केन्या के कप्साबेट से आने वाले इस एथलीट की यात्रा एक अपरंपरागत तरीके से शुरू हुई। उन्होंने अपने परिवार की बकरियों को चराते हुए दौड़ना शुरू किया। उनके शुरुआती अनुभवों ने एक ऐसे करियर की नींव रखी जो उन्हें एथलेटिक्स की दुनिया में महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल करने में देखेगा।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2012 | Men Marathon | S रजत |
रेनाटो कैनोवा उन्हें प्रशिक्षित करते हैं, उच्च स्तरीय प्रतियोगिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। कैनोवा के संरक्षण में, उन्होंने अपने कौशल को निखारा है और दुनिया भर में मैराथन में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।
उनके परिवार में एथलेटिक प्रतिभा चलती है। उनके भाई-बहन, माइकल रोटिच और जेम्स सोंगोक, भी एथलीट हैं। खेलों के प्रति इस पारिवारिक संबंध ने निस्संदेह एक धावक के रूप में उनके विकास और सफलता में भूमिका निभाई है।
2011 में, उन्होंने अपना विश्व चैम्पियनशिप मैराथन खिताब बचाने वाले तीसरे व्यक्ति बनकर इतिहास रच दिया। उन्होंने 2009 में बर्लिन में अपनी जीत के बाद डेगू में एक और स्वर्ण पदक जीता। 2011 में उनका जीतने का अंतर विश्व चैम्पियनशिप के इतिहास में सबसे बड़ा था।
ट्रैक पर उनकी उपलब्धियों ने पुलिस बल में उनके करियर को भी लाभान्वित किया है। डेगू में अपनी जीत के बाद, उन्हें इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत किया गया। वह 2012 के ओलंपिक खेलों में जीतने या विश्व रिकॉर्ड तोड़ने पर आगे बढ़ने की उम्मीद करते हैं।
उनका मानना है कि "दौड़ना सिर्फ पैर नहीं होता है। यह दिमाग भी होता है।" यह दर्शन लंबी दूरी की दौड़ में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए आवश्यक मानसिक शक्ति को रेखांकित करता है।
बकरियों को चराने से लेकर विश्व चैंपियन मैराथन धावक बनने तक इस एथलीट की यात्रा उनकी समर्पण और कड़ी मेहनत का प्रमाण है। उनकी कहानी दुनिया भर के कई आकांक्षी एथलीटों को प्रेरित करती रहती है।