
क्रिस्टियन एरिक्सन (डेनमार्क)
अगर डेनमार्क की फुटबॉल टीम की बात करें तो क्रिस्टियन इस टीम की रीढ़ की हड्डी हैं। इस टीम की सफलता के पीछे इस खिलाड़ी का बड़ा हाथ होता है। गौरतलब हो की इस खिलाड़ी ने इस सीरीज के क्वालीफाई अभियान में 11 गोल जमाए हैं। वहीं अगर बात करें तो इस अभियान में अब तक उनसे ज्यादा गोल रॉबर्ट लीवांदोवस्की और क्रिस्टियानो रोनाल्डो ही जमा सके हैं। ऐसे में यह खिलाड़ी इस ग्रुप की टीम में गेमचेंजर साबित हो सकता है।

पॉल पोग्बा (फ्रांस)
इस ग्रुप की और इस सीरीज की सबसे मजबूत टीमों में से एक फ्रांस की टीम की अगर बात करें तो पॉल इस टीम की मिडफील्ड की जान हैं। गोल के लिए माबौल बनाने में पॉल का अहम रोहल होता है। वहीं मौका पड़ने पर खुद भी गोल जमाने की क्षमता रखते हैं। वह आमतौर पर सेंटर मिडफील्डर की पोजीशन पर खेलते हैं और जरूरत पड़ने पर अटैकिंग मिडफील्डर की तरह भी खेलते हैं।

जेफरसन फारफान (पेरू)
पेरू टीम की अगर बात करें तो इस टीम के कप्तान पाओलो गुइरेरो इस टीम के प्रमुख स्कोरर हैं वर वह क्वालीफाइंग रोउंड में ड्रग टेस्ट में फेल हो गए हैं। इसके बाद कप्तानी जेफरसन फारमान ने संभाली है। गौरतलब हो की वह एफसी लोकोमोटिव मास्को के लिए खेलते हैं और इस सीजन उन्होंने 11 गोल जमाकर 14 साल बाद वापसी की।

डेनियल अरजानी (ऑस्ट्रेलिया)
इस खिलाड़ी में तेजी से हमला बनाकर किसी भी डिफेंस को भेदने की क्षमता है। वह ईरान से सात साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया आकर बस गए। इस 20 वर्षीय खिलाड़ी के टीम में शामिल होने से हमलों में पैनापन आ गया है। वह इस सीजन में मेलबर्न सिटी को अपने शानदार प्रदर्शन से तीसरे स्थान पर पहुंचाने में सफल रहे हैं।
इस प्रकार हैं कार्यक्रमः 16 जून : फ्रांस बनाम ऑस्ट्रेलिया, पेरू बनाम डेनमार्क
21 जून : डेनमार्क बनाम ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस बनाम पेरू
26 जून : डेनमार्क बनाम फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया बनाम पेरू


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