एशियाड-2010 (हॉकी) : सेमीफाइनल में भिड़ेंगे भारत और मलेशिया
भारतीय टीम इस मुकाबले को जीतकर अपने लिए कम के कम रजत पदक सुरक्षित करना चाहेगी। उसका प्रयास हालांकि 1986 की सफलता को दोहराते हुए स्वर्ण पदक जीतना होगा। हाल ही में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने पहली बार रजत पदक जीता था। फाइनल में उसे विश्व चैम्पियन आस्ट्रेलिया से हार मिली थी।
मलेशिया के खिलाफ भारत को सावधान शुरुआत करनी होगी क्योंकि एशियाई शैली की माहिर यह टीम काफी अच्छे लय में है। उसने अपने पहले मुकाबले में सिंगापुर को 3-0 से हराया था जबकि उसका दूसरा मुकाबला दक्षिण कोरिया के साथ 2-2 की बराबरी पर छुटा था।
तीसरे मुकाबले में मलेशियाई टीम ने अपनी पूरी शक्ति झोंक दी और इसी का नतीजा था कि उसने ओमान को 12-2 से करारी शिकस्त दी थी। चौथे और अंतिम ग्रुप मुकाबले में मलेशिया ने हजारों प्रशंसकों की मौजूदगी के बावजूद मेजबान टीम को 4-2 से पटखनी दी थी।
दूसरी ओर, भारत ने अब तक अपने सभी ग्रुप मैच जीतकर सेमीफाइनल में स्थान पक्का किया है। भारत ने अपने पहले मुकाबले में हांगकांग को 7-0 से रौंदा था जबकि दूसरे मुकाबले में उसने बांग्लादेश को 9-0 से धूल चटाई थी। इसके बाद अपने सबसे कठिन ग्रुप मुकाबले में उसने पाकिस्तान को 3-2 से और अंतिम मुकाबले में जापान को इसी अंतर से हराया।
मंगलवार को ही खेले जाने वाले दूसरे सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया का सामना पाकिस्तान के साथ होगा। इस मुकाबले में पाकिस्तान को जीत मिलती है और भारत अगर मलेशिया को हराकर फाइनल में पहुंच जाता है तो फिर चीन में एक बार फिर चिर-प्रतिद्वंद्वियों की भिड़ंत देखने को मिलेगी।
ग्रुप मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 3-2 से हराया था। यही नहीं, इस वर्ष भारत चार मैचों में पाकिस्तान को हरा चुका है। विश्व कप में उसने 5-2, राष्ट्रमंडल खेलों में 4-1 और अजलान शाह हॉकी में 4-2 से जीत हासिल की थी।
भारत के लिए स्टार ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह का फार्म और रणनीति बदलते हुए अपने खेल में परिवर्तन लाना अहम साबित होगा। जापान के खिलाफ भारत ने लम्बे पास खेलने की जो रणनीति अपनाई थी, वह कारगर रही थी। संदीप ने अब तक सबसे अधिक 10 गोल किए हैं और उनके ड्रैग फ्लिक विपक्षी टीमों की हार का मुख्य कारण बने हैं।
साथ ही साथ भारत को अपनी रक्षापंक्ति को मजबूत करना होगा। जापान के खिलाफ भारत की रक्षापंक्ति की कमजोरी के कारण ही दो मैदानी गोल हुए थे। अग्रिम पंक्ति का सामनजस्य पाकिस्तान और जापान के खिलाफ शानदार रहा था लेकिन रक्षापंक्ति की कमजोरी को भुनाना विपक्षी टीम के लिए आसान काम होगा।
भारतीय टीम अच्छी लय में है। उसके पास 1986 का इतिहास दोहराने और ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई करने का शानदार मौका है। यह मौका हाथ से निकलने के बाद भारत को 2012 में लंदन में होने वाले ओलम्पिक खेलों के लिए दोबारा क्वालीफाईंग खेलना होगा। भारत अगर मलेशिया को हरा देता है तो उसे ओलम्पिक का टिकट हासिल करने के लिए सिर्फ एक मैच जीतना होगा, क्वालीफाईंग खेलने से वाकई बहुत आसान काम है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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