गचीबावली इंडोर स्टेडियम में ओलंपिक चैंपियन लिन ने केवल 45 मिनट में जिन के ऊपर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर दी।
पांचवी वरीयता प्राप्त 25 वर्षीय लिन को पूरे टूर्नामेंट के दौरान केवल सेमीफाइनल को छोड़कर कोई भी खिलाड़ी खास चुनौती नहीं दे सका। सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के दाई कुंचरो के खिलाफ उनका मुकाबला तीन सेटों तक खिंचा था।
बैडमिंटन के सुपर डान कहे जाने वाले लिन आल इंग्लैंड बैडमिंटन खिताब चार बार जीत चुके हैं। वह वर्ष 2004 में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी बने और केवल महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का निर्णय करने तक इस पर काबिज रहे।
खिताब जीतने के बाद लिन ने कहा, "लगातार तीन खिताब जीतकर मैं प्रसन्न और सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मैं पहली बार भारत आया और विजयी होकर वापस लौटने से खुश हूं।"
उन्होंने कहा, "मैं एक जीनियस नहीं हूं। मैं केवल कड़ी मेहनत करता हूं। मैंने जो हासिल किया है, उसे हासिल करना कठिन नहीं है।"
पहली बार विश्व चैंपियनशिप में खेल रहे जिन के लगातार गलतियां करने के कारण फाइनल में लिन पूरे मैच के दौरान कभी परेशानी में नहीं दिखे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।