बीसीसीआई के इंकार के बाद आईसीसी का रास्ता निकालने का आश्वासन (लीड-1)
वाडा के उपनियम में खिलाड़ियों को उस वक्त भी डोप संबंधी परीक्षण के लिए तैयार रहने को कहा गया है जब वे क्रिकेट नहीं खेल रहे हों। खिलाड़ियों में जारी रोष को देखते हुए बीसीसीआई ने भी इस संबंध में कड़ा रुख अपनाया है।
बोर्ड ने इस मामले को लेकर विरोध कर रहे खिलाड़ियों का साथ देते हुए कहा है कि खिलाड़ियों को अपने बारे में पूरी जानकारी देने का नियम बनाकर वाडा उनकी गोपनियता को भंग करना चाहता है।
बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर ने कहा, "हम मानते हैं कि क्रिकेट को डोपिंग से दूर रहना चाहिए। बीसीसीआई को इससे कोई आपत्ति नहीं है लेकिन हमारा मानना है कि वाडा को अगर डोप संबंधी परीक्षण करना ही है तब वह यह काम शिविरों या फिर किसी टूर्नामेंट के दौरान करे। खिलाड़ी जब आराम कर रहे हों, तब उनका परीक्षण नहीं किया जाना चाहिए। हम इसके खिलाफ हैं।"
बीसीसीआई ने अपनी कार्यकारिणी की बैठक के बाद यह फैसला किया। इस बैठक में कप्तान महेंद्र सिंह धौनी और युवराज सिंह तथा हरभजन सिंह जैसे वरिष्ठ खिलाड़ी मौजूद थे।
बीसीसीआई के इंकार ने आईसीसी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उसके लिए वाडा के उपनियम का पालन करना अनिवार्य है लेकिन बीसीसीआई को संतुष्ट किए बिना आईसीसी वाडा को संतुष्ट नहीं कर सकती।
आईसीसी ने कहा है कि वह मुद्दे की गंभीरता से अनभिज्ञ नहीं है। वह इस संबंध में प्रयास कर रही है और आशा है कि आने वाले दिनों में सबके हित में फैसला लिया जाएगा।
आईसीसी ने अपने बयान में कहा, "हमारा अगला लक्ष्य इस मुद्दे को लेकर आम सहमति बनाना है। आईसीसी फिलहाल इस संबंध में और कुछ कहने की स्थिति में नहीं है।"
वाडा के डोपिंग निरोधी उपनियम के अनुसार खिलाड़ियों को अपने बारे में पूर्वनिर्धारित जानकारी देनी होगी। उन्हें ऑनलाइन फार्म के जरिए यह बताना होगा कि वे कहां हैं, क्या कर रहे हैं और आने वाले दिनों में कहां जाने वाले हैं।
भारतीय खिलाड़ियों ने वाडा के इस उपनियम का खुलकर विरोध किया है। यही कारण है कि बीसीसीआई की ओर से इस उपनियम के संबंध में वाडा की शर्तो पर हस्ताक्षर नहीं किए जा सके हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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