अब शुरू हुआ है मेरा सफर : विजेंदर
विजेंदर ने आईएएनएस से कहा, "मेरे लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है। मेरा सफर तो अब शुरू हुआ है। अब मुझे कोई नहीं रोक सकता। ऐसे में जबकि सितंबर में विश्व चैंपियनशिप का आयोजन होना है, खेल रत्न से नवाजे जाने के कारण मैं बेहद उत्साहित महसूस कर रहा हूं। इससे निश्चित तौर पर मेरा प्रदर्शन निखरेगा।"
विजेंदर को चार बार की महिला मुक्केबाजी विश्व चैंपियन एम.सी. मैरीकॉम और पिछले साल बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुके पहलवान सुशील कुमार के साथ खेल रत्न से नवाजा गया है।
देश के सबसे बड़े खेल सम्मान की शुरुआत 1991 में हुई थी। तब से लेकर आज तक एक साथ तीन खिलाड़ियों को इस सम्मान से नहीं नवाजा गया था लेकिन इस साल यह क्रम टूट गया।
इससे पहले, 2002-03 में एक साथ दो खिलाड़ियों को यह सम्मान दिया गया था। उस वर्ष निशानेबाज अंजलि वेदपाठक और एथलीट ए.एम. बीनामोल को यह सम्मान मिला था।
24 साल के विजेंदर ने कहा कि राष्ट्रपति के हाथों खेल रत्न सम्मान हासिल करना उनके जीवन का सबसे सुखद अनुभव होगा। उन्होंने कहा, "ओलंपिक पदक जीतने के बाद मेरा जीवन रातो-रात बदल गया। मैं जानता हूं कि मुझे मुक्केबाजी के कारण ही प्रसिद्धि और सम्मान मिला है, लिहाजा मैं लगातार अच्छा प्रदर्शन करता रहूंगा। मैंने ठान लिया है कि मैं कभी मेहनत से नहीं घबराऊंगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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