ओलंपिक में इतिहास बनाने में पीवी सिंधु के कोच की है बड़ी भूमिका, छोड़ दिया था अपना घर
टोक्यो, 02 अगस्त। स्टार भारतीय शटलर पीवी सिंधु ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। ओलंपिक में दो मेडल जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले कोई भी भारतीय महिला खिलाड़ी यह कारनामा नहीं कर पाई है। महिला सिंगल्स में सिंधु ने कांस्य पदक अपने नाम किया है। इस जीत के लिए पीवी सिंधु ने काफी कड़ी मेहनत की थी, जिसका परिणाम उन्हें मेडल के रूप में मिला है। इस जीत के साथ ही पीवी सिंधु ने साबित कर दिया है वह देश की शीर्ष खिलाड़ियों की फेहरिस्त में हैं।
कोच ने परिवार तक को छोड़ा
जब पीवी सिंधु ने भारतीय बैडमिंटन स्टार पुलेला गोपीचंद की बजाए विदेशी कोच पार्क टी सैंग के साथ काम करने का फैसला लिया था तो इसको लेकर काफी बहस हुई थी। लेकिन पीवी सिंधु का यह फैसला सही साबित हुआ और उन्होंने ओलंपिक में इतिहास रच दिया। अपने कोच के बारे में जीत के बाद सिंधु ने कहा कि मेरे कोच काफी खुश हैं। वह काफी कुछ मेरे खेल को सुधारने के लिए करते हैं, मैं उनका शुक्रिया अदा करना चाहती हूं। उन्होंने मेरे साथ महामारी में रहने के लिए सबकुछ छोड़ दिया। उन्होंने अपने परिवार को छोड़ा, उन्होंने हमेशा मुझमे भरोसा जताया और आखिर में हमने कर दिखाया। जीत के बाद मेरी आंखों में आंसू थे और मैं कोच के पास गई और उन्हें गले लगा लिया।
मेरे अंदर जुनून था
टोक्यो ओलंपिक में मेडल जीतना सिंधु के लिए काफी भावुक पल रहा। एक तरफ जहां उन्होंने खुद को सफलता की नई बुलंदियों पर पहुंचाया तो वहीं दूसरी बार ओलंपिक मेडल जीतकर इतिहास बनाया। सिंधु ने कहा कि मेरे अंदर हमेशा से जुनून था और मैं मेडल लाना चाहती थी। पहले मेरे गोल छोटे-छोटे समय के लिए थे। मैं पहले नेशनल जीतना चाहती थी, इसके बाद ग्रैंड प्रिक्स और फिर आगे। मैं हमेशा स्टेप बाई स्टेप आगे चल रही थी। 2016 में मेडल जीतने के बाद मैं खुश थी, लेकिन टोक्यो में खुद को फिर से साबित करना मेरे लिए अलग तरह की चुनौती थी।
शीर्ष पर बने रहना मुश्किल
अपनी सफलता के बारे में सिंधु ने कहा कि शीर्ष पर बने रहना काफी मुश्किल होता है। आपको लगातार अच्छा करते रहना होता है। इस स्तर तक पहुंचना ठीक है लेकिन वहां बने रहना काफी चुनौतीपूर्ण है। आपको लगातार कड़ी मेहनत करनी होती है, लोगों की आप पर हमेशा निगाह होती है। हर कोई आपका खेल जानता है, आपका स्टाइल जानता है, लिहाजा आपको इसी के हिसाब से बदलाव करना होता है। जीत के बाद भी सिंधु ने कहा कि 2016 के बाद से मैंने खुद को बेहतर किया है, लेकि हर दिन आपको सीखने के लिए कुछ ना कुछ होता है। कभी आप हारते हैं और कभी जीतते हैं, लेकिन आपको सीखना नहीं छोड़ना चाहिए।
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