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Tokyo Paralympics : जानिए काैन है 'गोल्ड' जीतने वाला प्रमोद, प्रेरणादायक है कहानी

नई दिल्ली। टोक्यो पैरालंपिक में भारतीय दल ने इतिहास का सबसे अच्छा खेल दिखाया है। प्रमोद भगत ने शनिवार को भारत के पहले पैरा-बैडमिंटन गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। 33 वर्षीय प्रमोद ने टोक्यो पैरालिंपिक में पुरुष एकल बैडमिंटन SL3 इवेंट में मेडल जीता। हालांकि, यहां तक पहुंचने का सफर प्रमोद के लिए आसान नहीं था। उनकी कहानी प्रेरणायादक है, जो किसी में भी आत्मविश्वास भरने में काफी है।

पोलियो से हैं पीड़ित

पोलियो से हैं पीड़ित

प्रमोद छह भाइयों और बहनों में से एक हैं। जब वे पांच साल के थे, तब उनके बाएं पैर में एक दोष विकसित हो गया था। उनके पिता चावल मिलों में काम करते हैं। उन्होंने अपने बेटे का इलाज करवाने के लिए अस्पतालों के कई चक्कर लगाए। अंतिम में एक डाॅक्टर ने बताया कि प्रमोद पोलियो का शिकार है जो पैर या हाथ को जकड़ सकता है। डाॅक्टर ने पैर या हाथ दोनों में एक को स्वस्थ रखने का जिम्मा उठाया। अंत में उनके पिता ने दूसरा विकल्प चुना। डाॅक्टर ने इलाज करते हुए प्रमोद के हाथ समालत रखे, लेकिन उनका बायां पैर पोलियो की जकड़ में आ गया। चलने में मुश्किल थी, लेकिन प्रमोद के सपनों में जान थी। उनके पिता ने भी बेटे को आगे बढ़ाने का पूरा प्रयास किया। प्रमोद ने फिर बैडमिंटन में हाथ आजमाना शुरू किया।

फिर बने नंबर वन खिलाड़ी

फिर बने नंबर वन खिलाड़ी

उनकी उम्र 33 साल है। प्रमोद का जन्म ओडिशा के बरगढ़ जिले में अट्टाबीरा में 4 जून 1988 को हुआ था। उनकी माता का नाम कुसुम देवी तो पिता का नाम कैलाश भगत है। प्रमोद ने बचपन में अपने पड़ोसियों को देखकर खेलने की प्रेरणा ली। फिर उसने खुद बैडमिंटन हाथ में थामने का फैसला किया। बैडमिंटन खेलने की रुचि एक पूर्ण जुनून में बदल गई। शुरूआत में, उन्होंने जिला स्तर पर सक्षम खिलाड़ियों के साथ खेला और यहां तक ​​कि जिला स्तर की प्रतियोगिता भी जीती। फिर शटलर पैरा-बैडमिंटन की ओर बढ़े। प्रमोद ने फिर रिकॉर्ड तोड़े और कई इनाम जीते। प्रमोद अब तीन बार के विश्व चैंपियन हैं। वह एकल और युगल दोनों प्रारूपों में समान रूप से अच्छा खेल सकते हैं। प्रमोद इस समय दुनिया के नंबर वन बैडमिंटन पैरा एथलीट हैं।

फैजा पैरा-बैडमिंटन इंटरनेशनल 2019 में बटोरी थी सुर्खियां

फैजा पैरा-बैडमिंटन इंटरनेशनल 2019 में बटोरी थी सुर्खियां

प्रमोद ने अपना पहला टूर्नामेंट सामान्य श्रेणी के खिलाड़ियों के खिलाफ तब खेला था जब वह 15 साल के थे। उन्हें दर्शकों द्वारा प्रोत्साहित किया गया, जिसने उन्हें अपने बैडमिंटन करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अप्रैल 2019 में दुबई में आयोजित हुए दूसरे फैजा पैरा-बैडमिंटन इंटरनेशनल 2019 में पुरुष एकल वर्ग में प्रमोद ने गोल्ड मेडल जीतकर सुर्खियां बटोरीं थीं। इस साल मार्च के महीने में, पैरा शटलर ने तुर्की के अंताल्या में पांचवें तुर्की पैरा-बैडमिंटन इंटरनेशनल- ENES CUP 2019 में जीत हासिल की। प्रमोद ने 2018 में इसी टूर्नामेंट के पिछले संस्करण में दो ब्राॅन्ज मेडल भी जीते थे। अप्रैल में शारजाह में IWAS विश्व खेलों में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता था।

Story first published: Saturday, September 4, 2021, 17:14 [IST]
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