
पहला राउंड जीतने के बाद आखिर ये क्या हुआ?
तीसरे राउंड तक आते-आते अमित बेहाल हो चुके थे और ऐसा लग रहा था मानो इस भारतीय मुक्केबाज ने अपनी सारी एनर्जी पहले ही राउंड में खत्म कर दी है। मुक्केबाजी में भारत के इतने बड़े नाम पंघाल का पहले ही दौर से बाहर होना सभी का दिल दुखा गया है, और इसके साथ ही एक बड़ा सवाल भी छोड़ गया है कि पहले राउंड की शानदार जीत के बाद आखिर ऐसा क्या हुआ कि बाद के दो राउंड इतनी बुरी तरीके से हारने पड़े?
इन सब चीजों पर अमित पंघाल के पिता विजेंद्र से बात हुई है। पिता विजेंद्र ने दैनिक जागरण के साथ बातचीत में इस बात का खुलासा किया कि कहीं ना कहीं यह कोच के साथ जुड़ी समस्या थी जिसके कारण अमित को हार का सामना करना पड़ा। दरअसल अमित पंघाल अपने लिए एक निजी कोच चाहते थे और उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को चिट्ठी लिख दी थी, लेकिन उनको किसी भी तरह का कोई पर्सनल कोच उपलब्ध नहीं कराया गया। कई खिलाड़ी ऐसे होते हैं जिनको निजी कोच उपलब्ध कराया जाता है पर अमित का नाम उनमें नहीं था।
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भारतीय मुक्केबाज को पर्सनल कोच की कमी खली-
अमित पंघाल के कोच अनिल धनखड़ हैं और उनको भी विश्वास नहीं हो रहा है कि उनका शागिर्द टोक्यो ओलंपिक के पहले ही राउंड में ऐसे हार जाएगा। बताया यह भी गया है कि अमित इस हार के बाद इस कदर थकान महसूस कर रहे थे कि कुर्सी से हिल नहीं पाए लेकिन दैनिक भास्कर के हवाले से यह जानकारी मिलती है कि अमित ठीक हैं, लेकिन उनका खानपान बिगड़ गया था।
अमित के आसपास के लोगों से मिली जानकारियों के मुताबिक यही बात निकल कर सामने आई है कि कहीं ना कहीं भारतीय मुक्केबाज को पर्सनल कोच की कमी खली है। इसके लिए मुक्केबाज स्पोटिंग स्टॉप भी कटघरे में आ गया है क्योंकि भारत ने अपना एक बड़ा मेडल खो दिया है।

भारत को बॉक्सिंग में दूसरा अप्रत्याशित परिणाम देखने को मिला-
दैनिक जागरण के हवाले से पिता विजेंदर यह भी बताते हैं कि 10 दिनों से अमित की किसी ने प्रैक्टिस भी नहीं कराई थी और मैं खुद ही अपनी प्रैक्टिस की देखरेख कर रहे थे। इससे पहले ऐसा नहीं हुआ था कि मुकाबले के दौरान ही अमित का सांस ऐसे फूल जाए। शायद प्रैक्टिस की कमी इसका सबसे बड़ा कारण है कि अमित निढाल दिखाई दिए। अमित पर्सनल कोच की डिमांड इसलिए भी कर रहे थे क्योंकि उनका तालमेल मौजूदा कोचों के साथ नहीं बन पा रहा था। इसका कारण यह है कि एक विदेशी कोच है जो हिंदी नहीं जानते और दूसरे कोच दक्षिण भारतीय भाषा बोलते हैं।
इसके अलावा अमित मनोवैज्ञानिक तौर पर भी काफी दबाव महसूस कर रहे थे क्योंकि उनके साथी बॉक्सर भी बाहर हो चुके थे और देश भर की करोड़ों उम्मीद है उन्हीं पर टिक गई थी। इस ओलंपिक में भारत को मुक्केबाजी में दूसरी बार अप्रत्याशित परिणाम देखने को मिला क्योंकि इससे पहले मेडल की प्रबल दावेदार महान मुक्केबाज मैरीकॉम भी प्री क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर बाहर हो गईं थीं।


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