भारतीय टीम के वो 3 खिलाड़ी जो बन सकते थे महान कप्तान पर कभी नही मिला मौका
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट ने पिछले 2 दशकों में जितनी सफलता देखी उतनी शायद ही उससे पहले कभी मिली थी। ऐसा नहीं है कि इससे पहले भारतीय टीम की कमान सही हाथों में नहीं था या भारत ने क्रिकेट में तरक्की नहीं की लेकिन क्रिकेट के खेल में पिछले 2 दशकों में भारतीय टीम का दबदबा जिस तरह का रहा वह उससे पहले कभी भी देखने को नहीं मिला। इस दौरान हमने भारतीय टीम में सौरव गांगुली और विराट कोहली की आक्रामक कप्तानी देखी तो कप्तान एमएस धोनी का कूल अंदाज देखा जिसने हमें एक बार फिर से विश्व विजेता बनाया।
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पिछले 2 दशक के दौरान भारतीय टीम ने कई कप्तान देखे, कई कप्तानों ने टीम को उच्च स्तर पर पहुंचाया तो कुछ कप्तानों ने मुश्किल हालात में टीम को संभालने का काम किया। इस दौरान भारतीय टीम में कुछ ऐसे भी महान खिलाड़ी हुए जिन्होंने खेल में हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ दिया लेकिन बावजूद इसके उन्हें एक बार भी भारतीय टीम की कमान संभालने का मौका नहीं मिला। आइये एक नजर उन्हीं 3 महान खिलाड़ियों पर डालते हैं-
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जहीर खान (Zaheer Khan)
भारतीय टीम के सबसे अच्छे तेज गेंदबाजों में से एक जहीर खान जिन्होंने 2003 और 2011 के विश्व कप में अपनी स्विंग, गति और रिवर्स स्विंग से विदेशी बल्लेबाजों के पसीने छुड़ाए, और दोनों ही विश्व कप अभियान में भारतीय गेंदबाजी सफलता का मुख्य कारण बनें इसके बावजूद उन्हें भारतीय टीम की कमान संभालने का कभी मौका नहीं मिला।
जहीर खान ने भारत के लिये 610 अंतर्राष्ट्रीय विकेट हासिल किये। मैदान पर जहीर खान जिस तरह से बल्लेबाजों के दिमाग से खेला करते थे, उससे यह साफ है कि वह भारतीय टीम के लिये एक अच्छे कप्तान साबित हो सकते थे।

युवराज सिंह (Yuvraj Singh)
2001 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में भारत की डगमगाती नाव को बचाने वाले युवराज सिंह ने भारतीय टीम के लिये कई बार संकटमोचक का काम किया। 2007 टी20 विश्व कप हो या 2011 का वनडे विश्व कप, दोनों ही टूर्नामेंट में बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने भारत के लिये सबसे ज्यादा रन बनाते हुए मध्य क्रम को संभाला और भारतीय टीम को विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई।
धोनी के साथ घरेलू क्रिकेट खेलने वाले इस खिलाड़ी ने उनसे पहले क्रिकेट में डेब्यू किया और टीम का अहम अंग बन गए। टी20 विश्व कप में युवराज सिंह के 6 लगातार छक्के आज भी फैन्स के बीच यादगार हैं।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए भारत के लिये 2011 विश्व कप में लगातार खेलने वाले इस खिलाड़ी की खेल के प्रति प्रतिबद्धता देखकर साफ लगता है कि वह शानदार कप्तान साबित होते हालांकि टीम के लिये कई मैच जिताऊ पारियां खेलने के बावजूद इस खिलाड़ी को एक बार भी टीम की कप्तानी करने का मौका नहीं मिला।

वीवीएस लक्ष्मण (VVS Laxman)
कोलकाता में 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच की उस पारी वाले खिलाड़ी लक्ष्मण को कौन भूल सकता है। कलाई का यह जादूगर भारत के मुख्य टेस्ट बल्लेबाजों में से एक रहा। वनडे क्रिकेट में उन्हें ज्यादा खेलने का मौका नहीं मिला लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने टीम के लिए कई बेहतरीन पारियां खेली। लक्ष्मण को भी भारतीय टीम का कप्तान बनने का सौभाग्य एक बार भी नहीं मिला।
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