
फुटबॉल से चुराया है फ्रैंचाइजी लीग फॉर्मेट का नियम
साल 2008 में शुरु हुई इस फ्रैंचाइजी लीग को शुरु करने के बीच भारत के भगोड़े कारोबारी ललित मोदी का दिमाग रहा, जिसकी बदौलत भारतीय क्रिकेट को आईपीएल जैसी बेशकीमती लीग मिली। हालांकि फ्रैंचाइजी लीग क्रिकेट से काफी समय पहले से फुटबॉल में खेली जाती रही है।
फुटबॉल लीग में भी जमकर पैसा बरसता है। आईपीएल को शुरु करने का आइडिया यहीं से चोरी किया गया है। भारत में आईपीएल ने सफलता के एक नये आयाम रचे और कई स्टार खिलाड़ी दिये जिन्हें इस मंच के जरिये नाम और पहचान मिली।
इसके अलावा हर साल आईपीएल में होनी वाली खिलाड़ियों की नीलामी के दौरान भी फ्रैंचाइजी टीमें अच्छी खासी रकम अदा करके बड़े-बड़े खिलाड़ियों को अपने खेमे में जोड़ती हैं। इसके जरिये खिलाड़ियों को करोड़ों रुपये के कॉन्ट्रैक्ट्स मिलते हैं। ऐसा नहीं है कि फ्रैंचाइजी बड़े खिलाड़ियों पर ही पैसे लगाती हैं बल्कि युवा खिलाड़ी भी इसमें अच्छे-अच्छे कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल कर रातों-रात करोड़पति बन जाते हैं।

सेमीफाइनल के बजाय प्लेऑफ कराने का नियम
2008 में जब आईपीएल की शुरुआत हुई थी तो उस समय के प्रारूप और मौजूदा फॉर्मेट में काफी अंतर आ चुका है। शुरुआत में यह लीग आईसीसी के किसी भी आम टूर्नामेंट की तरह सेमीफाइनल वाले फॉर्मेट में खेली जाती थी जिसमें नॉकआउट मुकाबले होते थे। हालांकि आगे चलकर आईपीएल ने फुटबॉल से एक और आइडिया चुरा लिया।
साल 2011 में आईपीएल में प्ले ऑफ फॉर्मेट की शुरुआत की गई जिसने इस टूर्नामेंट को और भी मजेदार बना दिया। इस फॉर्मेंट के तहत कुल 4 टीमें नॉकआउट राउंड में पहुंचती हैं। जहां से टेबल में पहले स्थान पर काबिज टीम दूसरे नंबर वाली टीम के साथ प्लेऑफ खेलती है जबकि 3 और 4 नंबर की टीम क्वॉलिफायर में दम दिखाती है।
क्वालिफॉयर में जीत हासिल करने वाली टीम को प्लेऑफ 1 में हारने वाली टीम के साथ दूसरा प्लेऑफ खेलना पड़ता और जीतने वाली टीम फाइनल का सफर करती है। इसके बाद फफाइनल मुकाबला खेला जाता है। इसे ही प्ले ऑफ फॉर्मेट कहा जाता है।
यूं तो आईपीएल ने पहले सीजन में ही अपने लाखों फैन बना लिये थे लेकिन प्लेऑफ फॉर्मेट के आने के बाद से यह लीग फैन्स के बीच और भी मशहूर हो गई और मौजूदा समय में फैन्स इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं।

घरेलू मैदान पर रिजर्व मैच और बाहर खेलने का नियम
आईपीएल में मौजूदा समय में भारत की 8 घरेलू फ्रैंचाइजी टीमें लीग का हिस्सा बनती है। एक सीजन के दौरान हर टीम नॉकआउट मुकाबलों से पहले करीब 14 मैच खेलती है जिसमें उसे हर टीम के साथ 2 मुकाबले खेलने होते हैं। इसमें खेले गये हर मुकाबले के लिये प्रत्येक टीम के पास उसका एक होम और एक अवे ग्राउंड होता है। इसके अनुसार हर टीम को करीब 7 मैच अपने होम स्टेडियम में खेलने होते हैं और बाकी के 7 मैच अलग- अलग फ्रैंचाइजी टीमों के स्टेडियम जिन्हें अवे कहा जाता है।
आईपीएल में यह शुरुआत से होता आ रहा है, जिसमें जो भी टीम प्वॉइंट्स टेबल पर टॉप-4 में रहती है वह प्लेऑफ के लिए क्वालिफाई करती है। इसके अलावा टीमों में होम अवे जर्सी का चलन भी देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलौर की टीम जब अपने होम ग्राउंड यानि चिन्नास्वामी क्रिकेट स्टेडियम में खेलती है तो ग्रीन कलर की जर्सी में नजर आती है।
गौरतलब है कि आईपीएल में दिखाई देने वाला यह चलने फुटबॉल की फ्रैंचाइजी लीग से कॉपी किया गया है। असल में होम ग्राउंड पर खेलने से घरेलू टीम को परिस्थितियों का एडवांटेज मिलता है। इसलिए एक मैच होम ग्राउंड और एक अवे ग्राउंड पर खेलाया जाता है, ताकि सभी टीमों को बराबर तरीके से फायदा मिल सके।


Click it and Unblock the Notifications
