इतिहास के वो 5 दिग्गज खिलाड़ी जिन्होंने करियर छोड़ खेला क्रिकेट, एक भारतीय भी शामिल

नई दिल्ली। दुनिया भर के सबसे मशहूर खेलों में से एक क्रिकेट को सिर्फ एशियाई देशों में ही नहीं बल्कि कई और बड़े देशों में प्यार मिलता है। भारत में तो फैन्स क्रिकेट को एक धर्म की तरह फॉलो करते हैं। यही कारण है कि इस खेल के दीवानों की कमी नहीं है और हर रोज एक खिलाड़ी अपने टैलेंट का सम्मान करते हुए क्रिकेट में अपना करियर बनाने की ओर बढ़ जाता है। हालांकि यह खेल जितना मजेदार है उतना ही प्रतिस्पर्धात्मक भी, जिसके चलते किसी खिलाड़ी का अपने देश का प्रतिनिधित्व कर पाना आम बात नहीं है।

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ऐसे में खिलाड़ी को खेल के प्रति जुनून के साथ-साथ किस्मत का भी साथ चाहिये होता है। हालांकि क्रिकेट इतिहास में कुछ ऐसे भी खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने अपने अच्छे खासे करियर को इस खेल के प्रति अपने जुनून के लिये छोड़ दिया और आज दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में अपना नाम शुमार कर चुके हैं। आइये एक नजर क्रिकेट इतिहास के उन 5 खिलाड़ियों पर डालते हैं:

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नाथन लियॉन (Nathan Lyon)

नाथन लियॉन (Nathan Lyon)

मौजूदा समय में दुनिया के टॉप स्पिनर्स में से एक मुख्य स्पिन गेंदबाज के रूप में जाने जाते हैं ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के लिये खेलने वाले नाथन लियॉन। वह कंगारू टीम का अहम हिस्सा माने जाते हैं, खास तौर से टेस्ट टीम का, पर क्या आप जानते हैं कि क्रिकेट खेलने से पहले वह क्या करते थे।

आपको यह जानकर बेहद हैरान होगी कि नाथन लियॉन ऑस्ट्रेलिया के लिये क्रिकेट खेलने से पहले स्टेडियम में पिच क्यूरेटर का काम करते थे। पिच को लेकर उनकी समझ इतनी बेहतरीन थी कि उन्हें जल्द ही एडिलेड ओवल में ग्राउंडमैन की नौकरी मिल गई। हालांकि वह यहां पर भी नहीं रुके। नाथन ने अपनी स्पिन गेंदबाजी से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा और कुछ वक्त में ही ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम का हिस्सा बन गए। अपने करियर मे वह 96 टेस्ट मैच खेल चुके हैं जिसमें 3.00 की औसत के साथ उन्होंने अपने नाम 390 विकेट कर लिये हैं।

ब्रैड हॉज (Brad Hodge)

ब्रैड हॉज (Brad Hodge)

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के पूर्व कोच और बल्लेबाज ब्रैड हॉज का नाम भी उन खिलाड़ियों कि लिस्ट में शुमार है जिन्होंने करियर की शुरुआत क्रिकेट से नहीं बल्कि किसी और प्रोफेशन से की थी। वह ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट टीम में शामिल होने से पहले एक पेट्रोल पंप अटेंडेंट का काम करते थे। हॉज ने काफी मुश्किलों का सामना करते हुए जीवन में कठिन संघर्ष किया और अपने सपने को सच करके दिखाया। अपने टैलेंट के दम पर हॉज ने ऑस्ट्रेलियाई टीम में जगह तो बना ली लेकिन वह ज्यादा समय तक खेल नहीं पाये।

ब्रैड हॉज ने 6 टेस्ट, 25 वनडे और 15 टी20 मैचों में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व किया और इस दौरान 55.88 की औसत से 503 टेस्ट रन, 30.26 की औसत से 575 वनडे रन और 127.08 की स्ट्राइक रेट के साथ 183 टी20 रन बनाए। उल्लेखनीय है कि अपने 6 टेस्ट मैच के दौरान हॉज ने 1 दोहरा शतक और 2 अर्धशतक जमाया।

शेन बॉन्ड (Shane Bond)

शेन बॉन्ड (Shane Bond)

न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज शेन बॉन्ड भी उन खिलाड़ियों में शुमार हैं जिन्होंने करियर की शुरुआत क्रिकेट से नहीं की थी। अपने करियर के दौरान ज्यादातर समय चोटों का सामना करने वाले इस गेंदबाज ने अपने करियर की शुरुआत बतौर पुलिसवाले के रूप में की थी। इसके लिये उन्होंने 1999-2000 में पुलिस ट्रेनिंग भी ली थी। शेन बॉन्ड ने न्यूजीलैंड के लिये 18 टेस्ट मैच खेलकर 3.41 की औसत से 87 विकेटस झटकने का काम किया। साथ ही सीमित ओवर्स प्रारूप के 82 वनडे मैचों में 147 विकेट और 20 टी20 मैचों में 25 विकेट हासिल किये।

ड्वेन लीवरॉक (Dwayne Leverock)

ड्वेन लीवरॉक (Dwayne Leverock)

2007 में खेले गये वनडे विश्व कप के दौरान बरमूडा ने पहली बार आईसीसी के इतने बड़े टूर्नामेंट में क्वालिफाई किया था। हालांकि इस टूर्नामेंट के दौरान एक खिलाड़ी काफी मशहूर हुआ था जिसका नाम था ड्वेन लीवरॉक। ड्वेन लीवरॉक अपने भारी भरकम शरीर के होने के बावजूद भारत के खिलाफ स्लिप में डाइव मारकर कैच लपकने के लिये काफी मशहूर हैं। उन्होंने रॉबिन उथप्पा का कैच पकड़ा था। ड्वेन के जैसे भारी-भरकम शरीर वाले खिलाड़ी से इतना शानदार कैच पकड़ने का अदभुत नजारा बहुत कम बार देखने को मिलता है और इसी नजारे ने उन्हें मशहूर कर दिया। पर क्या आप जानते हैं कि क्रिकेटर बनने से पहले ड्वेन लीवरॉक बरमूडा पुलिस में काम करते थे। इतना ही नहीं उन्होंने पुलिस ज्वाइन करने से पहले काफी समय तक एक वैन ड्राइवर के रूप में भी काम किया।

एमएस धोनी (MS Dhoni)

एमएस धोनी (MS Dhoni)

भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल कप्तानों में से एक एमएस धोनी जिन्होंने भारतीय टीम को अपनी कप्तानी में आईसीसी का हर खिताब जिताने का काम किया वह भी दिग्गज खिलाड़ियों की इस लिस्ट में शुमार है। धोनी ने अपने करियर की शुरुआत बतौर रेलवे टिकट कलेक्टर की थी। इस दौरान धोनी ने खड़गपुर स्टेशन पर बतौर टीटी 2 साल तक काम किया। साल 2004 में माही को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में मौका मिला जहां से उन्होंने वापस मुड़कर नहीं देखा। 2007 में उन्होंने टी20 विश्व कप में टीम की कप्तानी की और भारत को विजेता बनाया। इसके बाद टीम ने उन्हीं की कप्तानी में 2011 विश्व कप और 2013 में आईसीसी चैंपियनशिप भी जीता।

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Story first published: Wednesday, May 13, 2020, 22:58 [IST]
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