लॉर्ड्स पर फिर उतरेगी विश्व विजेता टीम
इन्हीं सुनहरी यादों को ताज़ा करने के लिए 1983 की विश्व विजेता टीम के धुरंधर बुधवार शाम लंदन के लॉर्ड्स मैदान पर उतरेंगे- जश्न मनाने के लिए.
ज़ाहिर है विश्व विजेता टीम के 14 खिलाड़ियों के मिलन का मौका और जीत की 25वीं सालगिरह यादों का पिटारा साथ लेकर आई है.
फ़ाइनल में तीन विकेट लेने वाली मदन लाल कहते हैं उस प्रतियोगिता की एक-एक बात उन्हें याद है- विव रिचडर्स को डाली वो गेंद जिसपर वो आउट हुए और ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ कपिल देव की 175 रनों की पारी जिसने भारतीय टीम को नई ऊर्जा दी.
मदन लाल कहते हैं, "कपिल की उस पारी को शब्दों में बयां करना मुश्किल है. अगर बीबीसी उस दिन हड़ताल पर नहीं होती तो शायद लोगों को एक ऐसी पारी देखने को मिलती जो कभी नहीं देखी हो."
1983 वर्ल्ड कप में फ़ाइनल के हीरो थे मोहिंदर अमरनाथ. आज़ाद भारत में भारतीय क्रिकेट टीम के पहले कप्तान लाला अमरनाथ के बेटे मोहिंदर अमरनाथ कहते हैं कि उस दिन उनके पिता अपने बेटे की उपलब्धि पर फूला नहीं समा रहे थे.
ऐसी ही कई खट्टी-मीठी यादों का खज़ाना लिए 25 साल बाद इकट्ठा हो रहे हैं कपिल देव और उनकी सेनानी. और इस जश्न का लुत्फ़ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं खिलाड़ी.
मदन लाल कहते हैं, "उस समय तो खेल के दवाब में हम लोग पूरी तरह मज़ा नहीं कर पाए थे लेकिन आज लॉर्ड्स पर पूरा-पूरा लुत्फ़ उठाएँगे."
आज के दिन लॉर्ड्स पर जश्न सुनिश्चित करने के लिए सुनील गावस्कर ने करीब एक साल पहले ही मैदान का लॉंग रूप बुक कर लिया था.
ज़ाहिर है इस मिलन में 25 साल पुरानी कई सुनहरी यादें ताज़ा होंगी और साथ ही इन धुरंधरों को कई नई सुंदर यादें संजोने का भी मौका दे जाएगी ये शाम.
कहने को तो ये जश्न लॉर्ड्स पर केवल 14 खिलाड़ी मनाएँगे लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि उसमें देश-विदेश में बसे लाखों भारतीयों का जश्न भी शामिल होगा जिनमें से कईयों ने पच्चीस साल पहले उस ऐतिहासक फाइनल में भारत की जीत का सपना देखा होगा और फिर उस सपने को सच होते हुए भी देखा होगा.
ज़ाहिर है विश्व विजेता टीम के 14 खिलाड़ियों के मिलन का मौका और जीत की 25वीं सालगिरह यादों का पिटारा साथ लेकर आई है.
फ़ाइनल में तीन विकेट लेने वाली मदन लाल कहते हैं उस प्रतियोगिता की एक-एक बात उन्हें याद है- विव रिचडर्स को डाली वो गेंद जिसपर वो आउट हुए और ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ कपिल देव की 175 रनों की पारी जिसने भारतीय टीम को नई ऊर्जा दी.
मदन लाल कहते हैं, "कपिल की उस पारी को शब्दों में बयां करना मुश्किल है. अगर बीबीसी उस दिन हड़ताल पर नहीं होती तो शायद लोगों को एक ऐसी पारी देखने को मिलती जो कभी नहीं देखी हो."
1983 वर्ल्ड कप में फ़ाइनल के हीरो थे मोहिंदर अमरनाथ. आज़ाद भारत में भारतीय क्रिकेट टीम के पहले कप्तान लाला अमरनाथ के बेटे मोहिंदर अमरनाथ कहते हैं कि उस दिन उनके पिता अपने बेटे की उपलब्धि पर फूला नहीं समा रहे थे.
ऐसी ही कई खट्टी-मीठी यादों का खज़ाना लिए 25 साल बाद इकट्ठा हो रहे हैं कपिल देव और उनकी सेनानी. और इस जश्न का लुत्फ़ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं खिलाड़ी.
मदन लाल कहते हैं, "उस समय तो खेल के दवाब में हम लोग पूरी तरह मज़ा नहीं कर पाए थे लेकिन आज लॉर्ड्स पर पूरा-पूरा लुत्फ़ उठाएँगे."
आज के दिन लॉर्ड्स पर जश्न सुनिश्चित करने के लिए सुनील गावस्कर ने करीब एक साल पहले ही मैदान का लॉंग रूप बुक कर लिया था.
ज़ाहिर है इस मिलन में 25 साल पुरानी कई सुनहरी यादें ताज़ा होंगी और साथ ही इन धुरंधरों को कई नई सुंदर यादें संजोने का भी मौका दे जाएगी ये शाम.
कहने को तो ये जश्न लॉर्ड्स पर केवल 14 खिलाड़ी मनाएँगे लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि उसमें देश-विदेश में बसे लाखों भारतीयों का जश्न भी शामिल होगा जिनमें से कईयों ने पच्चीस साल पहले उस ऐतिहासक फाइनल में भारत की जीत का सपना देखा होगा और फिर उस सपने को सच होते हुए भी देखा होगा.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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