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हॉकी के पतन पर शोक में डूब गया देश

नई दिल्ली, 11 मार्चः भारतीय हाकी के इतिहास का कल काला दिन था. पूरा देश भारतीय हाकी टीम के 1928 के बाद से पहली बार ओलंपिक के लिए क्वालीफाई न कर पाने पर शोक और शर्म में डूब गया.

पूर्व ओलंपियन और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी इस पतन के लिए भारतीय हाकी महासंघ "आई एच एफ" को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. कुछ ओलंपियनों ने सरकार से आईएचएफ को तत्काल भंग करने की मांग भी कर डाली है.

आईएचएफ के पूर्व उपाध्यक्ष गुफराने आजम ने इस पतन के लिए महासंघ को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह से हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने कहा कि देश की शर्मनाक पराजय के लिये महासंघ के अध्यक्ष के पी एस गिल पूरी तरह जिम्मेदार हैं और अब उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है.

आजम ने भारतीय हाकी टीम की इंग्लैंड के हाथों फाइनल में करारी पराजय के मद्देनजर हाकी प्रेमियों से तीन दिन का "राष्ट्रीय शोक" मनाने का अनुरोध करते हुये गिल के खिलाफ शुरू की गयी मुहिम में शामिल होने का अनुरोध किया है.

पूर्व ओलम्पियन जलालुद्दीन ने भी इस हार के लिये फेडरेशन को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया. एक अन्य पूर्व ओलम्पियन तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेर खान ने कहा कि देश में हाकी खेल के प्रबंधन के जिम्मेदारी हाकी के जानकारों को सौंपी जानी चाहिये.


ओलंपियन गगन अजित सिंह ने भी आईएचएफ को ही जिम्मेदार ठहराया. क्वालीफायर के फाइनल में ब्रिटेन के हाथों भारत की 2-0 से हार के बारे में उन्होंने कहा यह भारतीय हाकी का सबसे दुखद दिन है. आईएचएफ अध्यक्ष और कोच सहित आईएचएफ के चोटी के अधिकारियों को तुरंत पद छोड़ देना चाहिए और नये लोगों के लिए रास्ता बनाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि 80 साल बाद टीम का ओलंपिक के लिए क्वालीफाई न कर पाना केवल राष्ट्रीय शर्म ही नहीं बल्कि यह विश्व हाकी के लिए भी बड़ी निराशा है. उन्होंने कहा यह विश्व हाकी का नुकसान है क्योंकि बाकी लोग भी चाहते थे कि भारत बेहतर प्रदर्शन करे और वहां पहुंचे.

गगन ने कहा कि यह उनकी समझ से बाहर है कि प्रीमियर हाकी लीग (पीएचएल) में बेहतर प्रदर्शन करने वाले उनके लेन अयप्पा, संदीप सिंह और दीपक ठाकुर जैसे खिलाड़ियों को चयनकर्ताओं ने क्यों नजरअंदाज किया.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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