
नई दिल्ली। भारतीय टीम के सीनियर स्पिन गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन लंबे समय से वनडे टीम से बाहर हैं। क्रिकेट फैंस के दिमाग में यही बात घूमती है कि उन्हें अब टेस्ट का स्पेशल गेंदबाज बनाया गया गया है और वह अब टेस्ट ही खेलेंगे। लेकिन अश्विन का यह मानना नहीं है। 32 वर्षीय अश्विन का कहना है कि वनडे क्रिकेट को लेकर उनके बारे में एक राय बन गई है और प्रदर्शन के कारण नहीं बल्कि टीम की जरूरत के कारण बाहर हुए।
अश्विन से जब वनडे फॉर्मेट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता, यह एक राय बन गई है। मैं इसके लिये उपयुक्त हूं। सफेद गेंद (एकदिवसीय) के प्रारूप में मेरा रिकॉर्ड उतना बुरा नहीं है. यह सिर्फ सोच की बात है कि आधुनिक दौर के क्रिकेट में कलाई के स्पिनर बेहतर हैं इसलिये मैं बाहर हूं। अश्विन ने अपने आखिरी वनडे मैच की का जिक्र भी किया और उसमें की हुई परफाॅर्मेंस की औसत बताई। अश्विन ने कहा कि उन्होंने 30 जून 2017 को वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गये अपने आखिरी वनडे में 28 रन देकर तीन विकेट लिए थे। उन्होंने कहा कि मैं जब भी अपने करियर का देखूंगा तो यह कहूंगा कि मैं अपने प्रदर्शन के कारण नहीं बल्कि टीम की जरूरत के कारण बाहर किया गया।
2017 को खेला था आखिर मैचबता दें कि अश्विन ने अपना आखिरी वनडे मैच विंडीज के खिलाफ 30 जून 2017 को खेला था। वह भी तक 111 मैचों में 150 विकेट ले चुके हैं, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 4 विकेट लेकर 25 रहा। अश्विन का पता टीम में कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल की स्पिन जोड़ी के आने के बाद कटा। यह दोनों युवा गेंदबाज विश्व कप के लिए भी अपनी जगह तय कर चुके हैं। वहीं अश्विन इससे बाहर रहेंगे। खैर, अश्विन टेस्ट में बेस्ट दे रहे हैं। वह 65 मैचों में 342 विकेट ले चुके हैं।