'तेंदुलकर युग' के बाद कल से टीम इंडिया की कड़ी परीक्षा
पहले टेस्ट की पूर्व संध्या पर टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि अब खिलाडि़यों को यह स्वीकार करना होगा कि हमारे साथ सचिन तेंदुलकर नहीं हैं। अत: हमें उनके बिना ही अपनी रणनीतियों को बेहतर ढंग से अंजाम देना होगा। मुझे विश्वास है कि टीम के युवा खिलाड़ी किसी भी चुनौती से निपटने की क्षमता रखते हैं, इसे हम पहले भी कई बार साबित कर चुके हैं।
टीम इंडिया वनडे सीरीज की समाप्ति के बाद से मैच प्रैक्टिस नहीं कर सकी है। उसने नेट प्रैक्टिस काफी की है लेकिन दक्षिण अफ्रीकी हालात को जांचने और खुद को उसके अनुरूप ढालने के लिए मैच प्रैक्टिस बेहद जरूरी है। इस लिहाज से भारतीय टीम की तैयारी अधूरी है, एकदिवसीय मैचों के दौरान शार्टपिच गेंदों पर उसके कई प्रमुख बल्लेबाजों की कमजोरियां सामने आई हैं। बीते कुछ दिनों में भारतीय रणीतिकारों ने इस पर काम किया होगा लेकिन मेजबान टीम इसका मनोवैज्ञानिक फायदा जरूर उठाने का प्रयास करेगी। भारत को विश्व की सर्वोच्च वरीय टेस्ट टीम को उसी के घर में हराने के लिए अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।
यह 1996 के बाद पहला अवसर है जब टीम इंडिया सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के बिना खेलेगी। टीम में इसकी काबिलियत और दमखम है। भारतीय खिलाड़ी युवा हैं और उनमें कुछ कर गुजरने का माद्दा है। इस दौरे में विराट कोहली को चौथे क्रम की अहम जिम्मेदारी निभानी होगी। सचिन तेंदुलकर के संन्यास के बाद यह जगह खाली हुआ है।
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