सचिन को सलामी देने से महरूम रह गए डब्बावाले
नूतन मुंबई टिफिन बॉक्स सप्लायर्स (एनएमटीबीएसटी) के प्रवक्ता सुभाष तालेकर ने आईएएनएस से कहा, "हमें एमसीए से टिकट प्राप्त नहीं हुए। हमने इस सम्बंध में एमसीए प्रमुख शरद पवार को भी एक पत्र लिखा था लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद हम खुद पवार से मिले लेकिन उन्होंने हमें आश्वासन देकर चलता कर दिया।" तालेकर ने कहा, "50 से 100 डब्बावाले दैनिक काम से कुछ दिनों की फुर्सत लेकर स्टेडियम पहुंचने के लिए ललायित हैं। हमारे ये डब्बावाले क्रिकेट से संन्यास ले रहे महान सचिन को अपनी सलामी पेश करना चाहते हैं।"
तालेकर के मुताबिक उम्मीद है कि दूसरे या तीसरे दिन एमसीए डब्बावालों को टिकट मुहैया कराएगा और वे सचिन को सलामी देने पूरी तैयारी के साथ स्टेडियम का रुख कर सकेंगे। बकौल तालेकर, "हम उम्मीद कर रहे हैं कि हमें दूसरे या तीसरे दिन मैच टिकट मिलेंगे। ऐसा एमसीए के अधिकारियों ने कहा है। उम्मीद है कि एमसीए अपना वादा पूरा करेगा।"
तालेकर ने कहा कि डब्बावाले बीते 123 साल से मुंबई की सेवा कर रहे हैं और सचिन लगभग तीन दशक से भारतीय क्रिकेट की सेवा कर रहे हैं, ऐसे में डब्बावाले सचिन को मुंबई का प्रतीक मानने लगे हैं। तालेकर ने कहा, "सचिन मुंबई की पहचान हैं। उन्होंने पूरे देश का मान बढ़ाया है। हम इस महान क्षण में सचिन को सलामी देना अपनी ड्यूटी समझते हैं लेकिन अफसोस है कि एमसीए हमें ऐसा करने से रोक रहा है। हमने तो सिर्फ 100 टिकट की मांग की थी और वह भी पहली बार लेकिन हमारी नहीं सुनी गई।"
तालेकार ने कहा कि तय कार्यक्रम के मुताबिक डब्बावाले सचिन के सम्मान में बैनर लिए रहेंगे और उन्हें एक टिफिन (डब्बा) भी भेंट करने का फैसला किया गया है। इस तरह का डब्बा ब्रिटेन के राजकुमार चार्ल्स को भी भेंट किया जा चुका है। मुंबई में लगभग 5000 डब्बावाले काम करते हैं। ये शहर भर में काम कर रहे लोगों तक लगभग 20,000 टिफिन पहुंचाते हैं। खास बात यह है कि सबके टिफिन उनके दफ्तरों तक साल के 365 दिन समय से और सुरक्षित पहुंचते हैं।
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