मोहिंदर को लाइफ़टाइम एचीवमेंट अवार्ड
मुंबई में रविवार देर रात आयोजित इस समारोह में मोहिंदर अमरनाथ ने अपने पिता जाने माने खिलाड़ी लाला अमरनाथ के पदचिन्हों पर चलते हुए कर्नल सीके नायडू लाइफ़टाइम एचीवमेंट पुरस्कार हासिल किया. इस पुरस्कार में उन्हें एक ट्रॉफी और स्मृति चिन्ह के अलावा 15 लाख रुपए की राशि सौंपी गई.
1994 में उनके पिता और पूर्व भारतीय कप्तान लाला अमरनाथ इस पुरस्कार को पाने वाले पहले खिलाड़ी थे. इस मौक़े पर मोहिंदर अमरनाथ ने बड़े ही दार्शनिक अंदाज में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा,'' जब मैं बड़ा हो रहा था तब मेरे पिता लाला अमरनाथ बहुत ही प्रसिद्ध खिलाड़ी थे. उन्होंने मुझसे कहा था कि देखो बेटा नाम है अमरनाथ. इसके तुम्हें काफ़ी फ़ायदे भी होंगे तो कई बार नुकसान भी होंगे.''
मोहिंदर का कहना था,'' वो हमें अपने संघर्ष की कहानियां सुनाया करते थे, वो कहते थे कि देखो बेटा कभी दिल मत हारना, अगर तुम्हें कभी टीम में जगह न मिल पाए तो भी अपने प्रदर्शन पर हमेशा ध्यान देना. हम तीन भाई थे और वो हमारे हाथों की लकीरें देखा करते थे और पूछते थे कि बताओ तुममें से कौन कितनी बार विलायत जाएगा, उन दिनों विलायत जाना काफ़ी बड़ी बात थी.उनसे हमने काफ़ी कुछ सीखा.''
हालांकि इस मौक़े पर मोहिंदर अपने दिल का दर्द नहीं छिपा सके. उन्होंने कहा कि मेरे लिए इस खेल में वो सारे नियम नहीं थे जो कि औरों के लिए थे. कई बार मुझे ऐसा लगा कि कम प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को टीम में जगह मिली जब कि मुझे नहीं दी गई लेकिन मैं शुक्रगुज़ार हूं अपने पिता और पत्नी का जिन्होंने मुझे हौसला दिया.
गंभीर: बेहतरीन क्रिकेटर
इधर बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज़ी गौतम गंभीर को इस साल का बेहतरीन क्रिकेटर होने के नाते पॉली उमरीगर पुरस्कार से नवाज़ा गया. गौतम गंभीर ने कहा,'' वो इस मौक़े पर अपने परिवार, दोस्तों और शुभचिंतकों का धन्यवाद देना चाहते हैं क्योंकि उनकी ही वज़ह से मैं आज इस जगह पहुंचने में क़ामयाब हो सका हूं.''
उनका कहना था कि पिछले साल यहां वीरेंदर सहवाग आए थे और उन्हें खुशी है कि इस साल उन्हें इसके लिए चुना गया है. गंभीर का कहना था कि वो आगे भी कोशिश करेंगे कि अपने खेल के जरिए अपने देश के गौरव के लिए कार्य करते रहेंगे.
इस साल के बीसीसीआई पुरस्कार समारोहों में और कई श्रेणियों में भी पुरस्कार दिए गए जिनमें ख़ासतौर से दो ख़ास पुरस्कार भी शामिल हैं. राहुल द्रविड़ को सबसे ज्यादा कैच पकड़ने और मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को उनके अंतरराष्ट्री क्रिकेट में 20 साल पूरे होने पर ख़ास पुरस्कारों से नवाज़ा गया.
इसके साथ ही रणजी ट्रॉफी के पहले 75वें सीज़न (1934-35 से 2008-09) के हीरो राजिंदर गोयल और अमरजीत केपी को क्रमश सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले (640 विकेट) और सबसे ज्यादा रन (7623 रन) बनाने वाले खिलाड़ी के तौर पर पुरस्कारों से सम्मानित किया.
मुंबई की रणजी टीम को अब तक 38 बार जीतने पर ख़ास पुरस्कार सौंपे गए. इसके साथ ही बीसीसीआई ने अमिष साहेबा को सर्वश्रेष्ठ अंपायर पुरस्कार सौंपा.
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