नई दिल्ली। नेपाल क्रिकेट बोर्ड के लिए खुशी की खबर आई ही थी कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद्(आईसीसी) ने उनपर लगाया निलंबन समाप्त कर दिया है कि इसके बाद ही 31 वर्षीय ऑलराउंडर पारस खड़का ने टीम को बड़ा झटका दे दिया। खड़का ने ऐलान किया है कि वह नेपाल टीम की कप्तानी नहीं संभालेंगे। उनके नेतृत्व में नेपाल ने यूएई के खिलाफ अपनी पहली वनडे श्रृंखला भी जीती। वह नेपाल की तरफ से वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय में शतक जड़ने वाले पहले बल्लेबाज भी हैं।
पिछले लगभग दस साल से नेपाल की अगुवाई कर रहे पारस खड़का ने इस देश की सदस्यता फिर से बहाल करने के आईसीसी के फैसले के एक दिन बाद कप्तान पद से त्यागपत्र दे दिया। वह एक सदस्य के रूप में टीम से जुड़े रहेंगे। खड़का ने 'ट्विटर' पर पोस्ट में लिखा, 'यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि नेपाल क्रिकेट का निलंबन समाप्त कर दिया गया है। मैं नई समिति को नेपाल क्रिकेट, खिलाड़ियों और हितधारकों की आगे ले जाने के लिए शुभकामनाएं देता हूं। मैंने इसके बाद नेपाल क्रिकेट टीम के कप्तान पद से त्यागपत्र देने का फैसला किया है।'
खड़का एसोसिएट क्रिकेट में सबसे लंबे समय तक कप्तानी संभालने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने नवंबर 2009 में यह पद संभाला था। उनकी अगुवाई में नेपाल ने एकदिवसीय टीम का दर्जा हासिल किया और 2018 में विश्व कप क्वॉलिफायर में हिस्सा लिया। खड़का के कप्तान रहते ही नेपाल ने 2014 में टी20 विश्व कप में हिस्सा लिया था, लेकिन वह मुख्य ड्रा में जगह नहीं बना पाया था।
बता दें कि नेपाल के अलावा आईसीसी ने जिम्बाब्वे से भी सस्पेंशन हटा दिया है। जिम्बाब्वे और नेपाल को इस साल जुलाई में बोर्ड के कामकाज में सरकारी हस्तक्षेप के चलते निलंबित कर दिया गया था। आईसीसी ने अपने बयान में कहा है कि यहां आईसीसी चेयरमैन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिम्बाब्वे क्रिकेट चेयरमैन तावेंग्वा मुखुहलानी और जिम्बाब्वे की खेल मंत्री कस्ट्री कोवेंट्री और स्पोटर्स एंड रिक्रिएशन कमिशन के चेयरमैन जेराल्ड एमलोटश्वा के साथ हुई बैठक के बाद जिम्बाब्वे को वापस आईसीसी की सदस्यता प्रदान की गई है। नेपाल को भी शर्तों के आधार पर फिर से सदस्यता दी गई है।