
नई दिल्ली। यह सच है कि हार ना मानना ऑस्ट्रेलियाई खेल संस्कृति का एक हिस्सा है। कंगारू टीम मैदान पर केवल जीत के बारे में सोचती है। लेकिन मौजूदा ऑस्ट्रेलियाई टीम के हालात कुछ जुदा हैं। टीम के अंदर जीत वाला वह जज्बा नदारद है जिसके दम पर ऑस्ट्रेलिया ने 90 के दशक में क्रिकेट पर एकछत्र अपना राज किया था। इसके बावजूद भी एक बात जो आज तक वैसी ही है, वह है कंगारू टीम का हार ना पचा पाना। मौजूदा सीरीज में भारत के हाथों ऐतिहासिक हार की कगार पर खड़ी ऑस्ट्रेलियाई टीम ये बात अब पचा नहीं पा रही है।
सिडनी टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई टीम अब या तो हार सकती है या फिर किसी तरह मैच ड्रा करवा सकती है। अपने ही घर में हो रही इस दुर्गति के चलते ऑस्ट्रेलिया टीम में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। टीम के खिलाड़ी, कोच, कप्तानों की राय एक दूसरे से मिल नहीं रही है और खबर आई है कि टीम में मैदान पर अपनाई गई रणनीतियों को लेकर बहस भी हो चुकी है। इस बात की शुरूआत नाथन लियोन की उस हताशा से हुई थी जब उन्होंने कहा था हमारे गेंदबाज सिडनी के विकेट पर मौजूद नमी का फायदा उठाने में नाकामयाब रहे।
इसके बाद कंगारू टीम के गेंदबाजी कोच डेविड सेकर ने रहस्योघाटन किया कि कप्तान टिम पेन और उनके गेंदबाजों के बीच रणनीति को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। दूसरे दिन का खेल समाप्त होने के बाद इसको लेकर बहस भी हुई। सेकर ने कहा कि गेंदबाज कुछ और चाहते थे और टिम पेन कुछ और। यहां तक की खेल की समाप्ति के बाद इस मुद्दे पर उन लोगों की आपस में बहस भी हुई। इस बहस में टीम के मुख्य कोच जस्टिन लेंगर भी शामिल थे। इसके बाद पेन ने सेकर की इस बात को नकारते हुए कहा कि खिलाड़ियों में कोई भ्रम की स्थिति नहीं है बल्कि हमने अपनी योजनाओं को मैदान पर सही तरीके से लागू नहीं किया। इसके बाद पूर्व कंगारू तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने भी कहा कि सेकर की भी टीम के गेंदबाजी प्रदर्शन को लेकर कुछ जिम्मेदारियां बनती हैं और वे इससे पीछे नहीं भाग सकते।