ट्वेंटी-20 विश्व कप : भारत और पाक का पहला मुकाबला आज
संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित क्वालीफाईंग टूर्नामेंट जीतकर ट्वेंटी-20 विश्व कप में खेलने का हक हासिल करने वाली अफगानिस्तान की टीम को अपने पहले ही मैच में अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। उसका सामना 2008 के चैम्पियन भारत से होगा। यह मुकाबला अफगानिस्तान के लिए किसी भी लिहाज से आसान नहीं होगा क्योंकि उसके और भारतीय टीम के बीच अनुभव और प्रतिभा का बहुत बड़ा फासला है।
इसके बावजूद यह कहना गलत होगा कि अफगान टीम इस मैच को जीतने के बारे में नहीं सोच रही होगी। अपने दोनों अभ्यास मैचों में जीत हासिल करके इस टीम ने साबित किया है कि क्वालीफाईंग टूर्नामेंट जीतना महज इत्तेफाक नहीं था। उसमें भी दिग्गजों को चौंकाने का दमखम है।
अफगान टीम के बारे में कहा जाता है कि वह विषम परिस्थितियों में भी अपना कदम पीछे नहीं हटाती और अंतिम समय तक लड़ती रहती है। उसके खिलाड़ियों को यह गुण जन्मजात मिला है और यही कारण है कि भारतीय टीम भी उसे कमतर नहीं आंक रही है।
वेस्टइंडीज पहुंचने के बाद भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने कहा है कि उनकी टीम अफगानिस्तान को कमतर आंकने का भूल नहीं करेगी और न ही इस मैच को अभ्यास के तौर लेगी। भारत को काफी सावधानी से अफगानिस्तान से भिड़ना होगा क्योंकि ट्वेंटी-20 में कमजोर और अच्छी टीमों के बीच का फासला बहुत कम रह जाता है।
यह मैच भारत के लिए इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि बड़े अंतर से जीत हासिल करके वह अपना नेट रन रेट काफी अच्छा कर सकती है। वैसे दूसरे मैच में अफगानिस्तान का सामना दक्षिण अफ्रीका से होना है और कद के लिहाज से अफगान टीम के लिए दक्षिण अफ्रीका को हरा पाना काफी मुश्किल नजर आ रहा है।
यह अफगानिस्तान की टीम का दुर्भाग्य कहा जा सकता है कि अपने पहले ही विश्व कप में उसे ऐसे ग्रुप में रखा गया, जहां भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमें है, जिन्हें हराने के लिए उसे एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा। अफगान टीम को डेल स्टेन और जहीर खान जैसे तेज गेंदबाजों का सामना करने के साथ-साथ युद्ध की मार झेल रहे अपने करोड़ों देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतरने का भी दबाव झेलना होगा।
अफगानिस्तान की टीम ने अब तक छह ट्वेंटी-20 अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं, जिनमें से उसे चार में जीत मिली है। इसके अलावा उसे पांच एकदिवसीय मैचों का भी अनुभव है। उसने पांच में से तीन मैच जीते हैं।
दिन का दूसरा मुकाबला बांग्लादेश और मौजूदा चैम्पियन पाकिस्तान के बीच खेला जाएगा। ग्रुप-ए का यह मुकाबला काफी रोचक होगा क्योंकि पाकिस्तान पर जहां खिताब बचाने का दबाव है वहीं बांग्लादेश की टीम बिना किसी दबाव के मैदान में उतरेगी।
ग्रुप-ए की तीसरी टीम आस्ट्रेलिया है और इस लिहाज से दोनों टीमें उससे भिड़ने से पहले अपने नाम एक जीत दर्ज करा लेना चाहेंगी, जिससे कि उनके सुपर-8 दौर में पहुंचने का रास्ता साफ हो जाएगा।
विश्व कप में पाकिस्तान का रिकार्ड अब तक काफी अच्छा रहा है। उसने कुल 14 मुकाबले खेले हैं, जिनमें से 10 में उसकी जीत हुई है। यह विश्व कप में किसी टीम की सर्वाधिक जीत का आंकड़ा है।
दूसरी ओर, बांग्लादेश की टीम ने अब तक विश्व कप में सात मैच खेले हैं और उसे सिर्फ एक जीत नसीब हुई है। छह मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। इस लिहाज से बांग्लादेश की टीम एक बड़ी जीत के साथ विश्व कप के तीसरे संस्करण का शानदार आगाज करना चाहेगी।
पाकिस्तानी टीम अपने कई प्रमुख खिलाड़ियों के बगैर वेस्टइंडीज पहुंची है। शोएब मलिक, उमर गुल और यासिर अराफात के बगैर उसे जीत हासिल करने में थोड़ी मुश्किल होगी लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि खिताब बचाने के लिए उसके पास जरूरी संतुलन है।
अभ्यास मैचों में पाकिस्तान का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। गुरुवार को उसे जिंबाब्वे के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इसलिए पाकिस्तान को बांग्लादेश या फिर किसी भी कमजोर टीम को कमतर आंकने की भूल करने से बचना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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