कैसे बदल गई है भारतीय तेज गेंदबाजी, डालें एक नजर कंकशन के खौफनाक इतिहास पर
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम में तेज गेंदबाजी ने जो अध्याय पिछले कुछ समय से खोला है उसका नाम है- 'घातक'। ये ऐसा शब्द है जो भारतीय क्रिकेट में कभी भी तेज गेंदबाजी के लिए कल्पना नहीं किया जा सकता था लेकिन आज सामूहिक रूप से भारत का विश्व के सबसे बेहतरीन पेस अटैक में एक आक्रमण है जो किसी भी टीम की किसी भी परिस्थिति में परीक्षा लेने का माद्दा रखता है। फिलहाल जिस फार्म में भारतीय तेज गेंदबाजी चल रही है वह बल्लेबाजों की परीक्षा लेने की जगह उनको सीधा फेल कर रही है। डे-नाइट टेस्ट में भी इसी गेंदबाजी ने बांग्लादेश को केवल 106 रनों पर ढेर कर दिया।

डे-नाइट टेस्ट के पहले ही दिन 2 कंकशन सब्स्टिट्यूट
इसके साथ ही दो ऐसे बांग्लादेशी बल्लेबाज भी थे जिनको मोहम्मद शमी की गेंदों पर रिटारर्ड हर्ट लौटना पड़ा। ये खिलाड़ी कंकशन से जूझने के बाद मैदान से बाहर हो गए। कंकशन वह होता है जिसमें किसी बल्लेबाज को गेंद सिर पर या फिर गर्दन पर लगने के कारण चक्कर, सिर दर्द, उल्टी, भ्रम जैसी समस्याएं आने लगती हैं। अभी हाल ही में आईसीसी ने इससे संबंधित नियम बनाया था कि यदि किसी बल्लेबाज के हेलमेट, गर्दन पर गेंद लगती है तो टीम का फिजियो आकर उसका निरीक्षण करेगा कि बल्लेबाज खेलने की हालत में है या फिर नहीं। अगर बल्लेबाज नहीं को कंकशन के लक्ष्ण उभर रहे हैं तो उसकी जगह बेंच पर बैठा दूसरा खिलाड़ी ले लेता है। बांग्लादेश के साथ डे-नाइट टेस्ट के पहले दिन कुछ ऐसा ही हुआ। यह टेस्ट इतिहास में पहली बार भी है जब एक ही टीम के दो खिलाड़ी कंकशन के चलते बाहर हुए।
डे-नाइट टेस्ट के बीच में ही टीम से रिलीज हुए पंत और गिल, नए खिलाड़ी की हुई एंट्री

बदल गई भारतीय तेज गेंदबाजों की मानसिकता-
इनमें एक खिलाड़ी थे लिटन दास और दूसरे नईम जिनके हेलमेट पर शमी की गेंद लगी। लिटन तो पारी के बीच में रिटायर हो गए और पारी समाप्त होने के बाद नईम की जगह तैजुल इस्लाम ने ले ली। अभी तक टेस्ट इतिहास में पांच बार ऐसा हुआ है जब कंकशन सब्स्टिट्यूट लिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इसमें चार बार भारतीय गेंदबाजों ने बल्लेबाजों को कंकशन के चलते रिटायर किया। निश्चित तौर पर खेल में किसी के शरीर को नुकसान पहुंचाना कभी मकसद नहीं होता लेकिन क्रिकेट में गेंद बल्लेबाजों को चोटिल करने का इतिहास रखती है। हाल का कंकशन देखा जाए तो इसमें भारतीय तेज गेंदबाजों की घातकता साफ नजर आती है। यह दर्शाता है कि टीम में गेंदबाजी करने की मानसिकता पूरी तरह से बदल चुकी है।

कंकशन सब्स्टिट्यूट के इतिहास में आर्चर अकेले विदेशी
पहला कंकशन सब्स्टिट्यूट तब लिया गया था जब 18 अगस्त 2019 में एशेज टेस्ट के दौरान जोफ्रा आर्चर की गेंद पर स्टीव स्मिथ चोटिल हो गए थे और उनकी जगह पर मार्कस लाबुशाने को कंकशन सब्स्टिट्यूट के तौर पर बुलाया गया था। आर्चर के बाद के चार कंकशन सब्स्टिट्यूट भारतीय गेंदबाजी पर लिए गए। इसमें पहला मामला 1 सिंतबर 2019 को हुआ जब बुमराह की गेंद पर वेस्टइंडीज में डेरेन ब्रावो कंकशन के चलते वापस लौट गए और उनकी जगह पर जर्मेन ब्लैकवुड आए। फिर तीसरा कंकशन सब्स्टिट्यूट तब लाया गया जब भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच सीरीज में उमेश यादव की गेंद पर विपक्षी ओपनर डीन एल्गर रिटायर हो गए। यह वाकया 22 नवंबर 2019 का है और एल्गर के स्थान पर थ्युनिस डि ब्रुएन को लाया गया था। इसके बाद डे-नाइट टेस्ट में शमी की गेंद पर एक ही दिन में दो कंकशन सब्स्टिट्यूट बांग्लादेश को उतारने पड़े।
पिंक बॉल टेस्ट में 12 खिलाड़ियों से खेल गया बांग्लादेश, 3 गेंदबाज फिर भी पड़े भारी

ईडन में शमी ने नईम और लिटन को भेजा
बांग्लादेशी पारी के दौरान यह वाकया 20वें ओवर में हुआ। इस ओवर की तीसरी गेंद लिटन दास के हेलमेट पर लगी। वह एक बाउंसर गेंद को पुल करने के प्रयार में पूरी तरह से चूक गए थे। इसके बाद तुरंत मैदान पर फिजियो आया लेकिन दास तब ठीक दिखाई दे रहे थे और उन्होंने बल्लेबाजी करनी जारी रखी। लेकिन इसके बाद 22वे ओवर में जब ईशांत शर्मा गेंदबाजी करने आए दास को शमी के गेंद पर लगे प्रहार का असर महसूस हुआ। इसके बाद फिजियो वापस आए और उन्होंने अपने परीक्षण के बाद दास को रिटायर्ड घोषित कर दिया। इसके बाद जब लंच के बाद मैच शुरू हुआ तब लिटन दास के रिप्लेश के रूप में इबादत हुसैन ने बल्लेबाजी की। वहीं नईम हसन के सिर पर भी मोहम्मद शमी की गेंद लग गई। बांग्लादेश की टीम ने ताईजुल इस्लाम को कनकशन सब्स्टिट्यूट के रूप में उतारा।
- Male
- Female
- Others
- Under 18
- 18 to 25
- 26 to 35
- 36 to 45
- 45 to 55
- 55+


Click it and Unblock the Notifications
