महेन्द्र सिंह धोनी ने छोड़ी कप्तानी, आखिर क्यों है ये एक ब्रेकिंग न्यूज?
नई दिल्ली। टीम इंडिया के हरदिल अजीज कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने कप्तानी छोड़ दी है, ये हर मीडिया चैनल, अखबार, वेबसाइट की ब्रेकिंग न्यूज है। जिस देश में क्रिकेट केवल एक खेल नहीं बल्कि धर्म है, उस खेल का कप्तान अगर अपनी सीट छोड़ दे तो ये अपने आप में एक बड़ी खबर है लेकिन क्या धोनी की कप्तानी की खबर के बड़े होने के पीछे सिर्फ ये ही एक कारण है, तो हम आपको बता दें नहीं।
धोनी की कप्तानी छोड़ना इसलिए बड़ी बात है क्योंकि टीम इंडिया के कैप्टन कूल ने पिछले 12 सालों में भारत की क्रिकेट टीम को वो अवार्ड, इज्जत और जीत दिलाई है, जो उनसे पहले कोई और नहीं कर पाया था।
कपिल देव और सौरव गांगुली...सफल कप्तान...
कपिल देव जैसे हीरे ने 'मैन इन ब्लू' को पहली बार विश्वविजेता बनवाया था तो वहीं बंगाल टाइगर के नाम से विख्यात सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम ने सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ था लेकिन इन दोनों से कप्तानी के मामले में महेन्द्र सिंह धोनी बहुत आगे हैं। इस बात से कपिल और गांगुली दोनों ही इत्तफाक रखते हैं क्योंकि माही की कप्तानी में भारत दो बार क्रिकेट के अलग-अलग फार्मेट में विश्वविजेता बना है।

आईसीसी के सभी आयोजनों में टीम को जीत दिलाई
सिर्फ यही नहीं, बल्कि धोनी भारत के इकलौते ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने आईसीसी के सभी आयोजनों में टीम को जीत दिलाई है। उनकी कप्तानी में भारत ने 2007 में टी-20 विश्व कप और 2011 में 50 ओवरों के विश्व कप का खिताब हासिल कर इतिहास रचा, और 2013 में चैम्पियंस ट्रॉफी पर भी कब्जा जमाया।

पहली बार टेस्ट में नंबर-1 की कुर्सी पर
धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया पहली बार टेस्ट में नंबर-1 की कुर्सी पर काबिज हुई। उन्होंने कुल 199 मैचों में टीम का नेतृत्व किया।

सर्वश्रेष्ठ फिनिशर
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फिनिशर माने जाने वाले धोनी उर्फ माही ने टीम को कप्तान रहते कुल 110 मैचों में जीत दिलाई जबकि 74 मुकाबलों में उन्हें हार मिली। चार मुकाबले टाई और 11 मैचों का कोई परिणाम नहीं निकला।

एक बल्लेबाज के तौर पर भी धोनी कामयाब
कप्तान रहते हुए एक बल्लेबाज के तौर पर भी धोनी कामयाब रहे। उन्होंने कप्तान रहते एकदिवसीय में 54 का औसत और 86 के स्ट्राइक रेट से 6,683 रन बनाए। नंबर 7 पर बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने कई बार भारत को संकट से निकाला। धोनी ने 72 टी-20 मैचों में टीम की कमान संभाली और 41 जीत टीम को दिलाई और 28 हारों का सामना किया। एक मैच टाई और दो मैचों का परिणाम नहीं निकला।

करिश्माई कप्तान
धोनी को क्रिकेट इतिहास में करिश्माई कप्तान कहा जाता है। धोनी को पहली बार कप्तान की जिम्मेदारी 2007 में दी गई थी। उनकी पहली परिक्षा ही काफी मुश्किल थी। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने पहली बार टी-20 विश्व कप कराने का फैसला किया था। इस विश्व कप से अपनी कप्तानी की शुरुआत की और भारत को विजेता बनाकर इंडिया लौटे।

सबसे ज्यादा मैचों में कप्तानी करने वाले खिलाड़ी
वह टी-20 में सबसे ज्यादा मैचों में कप्तानी करने वाले खिलाड़ी हैं। टी-20 में कप्तान रहते उन्होंने 122.60 के स्ट्राइक रेट से 1112 रन बनाए। टी-20 में वह बिना अर्धशतक लगाने के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी हैं। टी-20 में उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 48 है।

धोनी भी उन लकी खिलाड़ियों में से एक
भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तानों में से एक हैं जिन्होंने अपनी कप्तानी में टीम को 49 में से 21 मैचों में सफलता दिखाई,एक उग्र कप्तान के रूप में मशहूर गांगुली ने कई नए खिलाडियों को अपनी कप्तानी के समय खेलने का अवसर प्रदान किया, धोनी भी उन लकी खिलाड़ियों में से एक रहे हैं।
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