झूलन गोस्वामी: सुबह 5 बजे पकड़ती थी रोज ट्रेन, संघर्ष की शानदार कहानी
नई दिल्ली। महिला वर्ल्ड कप के फाइनल में आज टीम इंडिया का मुकाबला इंग्लैंड से हो रहा है। फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत के सामने 229 रनों का लक्ष्य रखा हैं। भारतीय गेंदबाजों ने इंग्लैंड को 228 रनों पर रोक दिया। इसमें सबसे ज्यादा श्रेय टीम इंडिया की तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी को जाता है। झूलन ने शानदार गेंदबाजी करते हुए अपने 10 ओवरों के स्पैल में महज 23 रन देकर 3 विकेट झटक दिए और इंग्लैंड की कमर तोड़ दी। झूलन ने अपने स्पैल में 3 मेडन ओवर भी फेंके। झूलन की जिस तरह से आक्रमक गेंदबाजी की उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। आइए आपको झूलन गोस्वामी से जुड़ी खास बातों से रूबरू करवाते हैं।

झूलन गोस्वामी: एक हरफनमौला खिलाड़ी
झूलन निशित गोस्वामी पश्चिम बंगाल के नादिया की रहने वाली है। उनका जन्म 25 नवम्बर 1982 को हुआ था। झूलन गोस्वामी का घर चकदाह रेलवे स्टेशन के करीब ही है, जिसे लालपुर के नाम से जानते है। उनकी मां का नाम झरना तथा पिता का नाम निशित गोस्वामी है । उनके पिता इंडियन एयरलाइंस में कार्यरत हैं । झूलन के घरवाले उन्हें बाबुल के नाम से बुलाते हैं। झूलन को बचपन से ही क्रिकेट खेलना पसंद था।

लड़कों के साथ खेलती थी क्रिकेट
बचपन के दिनों में झूलन लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थीं। उन्हें क्रिकेट खेलने की वजह से कई बार अपनी मां से सजा भी मिल चुकी है। बचपन में लड़के उन्हें गेंदबाजी नहीं करने देते थे और उनकी धीमी गति के लिए उन्हें चिढ़ाते थे। इसी बात से उन्हें गेंदबाज बनने की प्रेरणा मिली।

गेंदबाज बनने की ट्रेनिंग
झूलन ने एम.आर.एफ. एकेडमी से क्रिकेट की ट्रेंनिग ली। उन्होंने डेनिस लिली से बॉलिंग टिप्स लिए और मेहनत करके अपनी स्पीड 120 कि.मी. प्रति घंटा की, जिसके बाद उन्होंने अपने क्रिकेट को नए मुकाम तक पहुंचा दिया।

क्रिकेट की वजह से मां से पड़ी थी मार
झूलन की बहन झुम्पा गोस्वामी के मुताबिक झूलन को स्कूल जाना बिल्कुल नहीं पसंद था। वो स्कूल जाने के बहाने लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने में लग जाती थी, जिसकी वजह से कईबार मां उसे घर में बंद कर दिया था। शुरूआत में उन्होंने टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला है।

झूलन का क्रिकेट प्रेम
झूलन को क्रिकेट से बेहद लगाव था। अपने क्रिकेट प्रैक्टिस के लिए वो सुबह 5 बजे चकदा स्टेशन से सियालदह कोलकाता ट्रेन लेती थी, फिर बस लेकर वो क्रिकेट प्रैक्टिट के लिए 7:30 बजे तक अपने अकेडमी पहुंचती थी। पिर वहां से 9.30 की ट्रेन लेकर अपने स्कूल पहुंचती थी, ताकि अपनी पढ़ाई को भी पूरा कर सके। वो हर दिन 4 घंटे इंटरसिटी ट्रेन में बिताकर अपने क्रिकेट की प्रैक्टिस के लिए जाती थी।

भारतीय टीम में हुई शामिल
5 फीट 11 इंच लंबी झूलन ने 14 जनवरी 2002 को इंग्लैंड महिला क्रिकेट टीम के साथ पहला टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला। उन्होंने 6 जनवरी 2002 को इंग्लैंड के साथ अपना पहला वनडे मैच खेला। उन्होंने गेंदबाजी के साथ-साथ अपनी बल्लेबाजी से भी लोगों के चकित किया है। इन्होंने वनडे में दो अर्धशतक भी लगाए हैं। अपने खेल की वजह से वो कप्तान चुनी गई।

झूलन के नाम रिकॉर्ड
झूलन गोस्वामी 2007 में उस वक्त सुर्ख़ियों में आईं, जब उन्हें विश्व की सबसे तेज गेंदबाज का खिताब मिला। आईसीसी ने उन्हें ‘महिला क्रिकेट आफ द ईयर' चुना गया। झूलन उस वक्त उस स्थान पर पहुंच गई थी, जहां कोई भारतीय पुरुष क्रिकेटर नहीं पहुंच सका।
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