रोहित शर्मा की तरह ही फेल हुए ये 14 धुरंधर, फिर बने बेहतरीन सलामी बल्लेबाज

Rohit Sharma

नई दिल्ली। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच जारी टेस्ट सीरीज के पहले मैच में सिर्फ एक ही बल्लेबाज का नाम लगातार छाया रहा और वो है रोहित शर्मा का। टेस्ट करियर में पहली बार बतौर सलामी बल्लेबाज मैदान पर उतरे रोहित शर्मा ने इस टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक लगाया और कई बड़े कीर्तिमान स्थापित किये। इसके साथ ही अपने करियर के पहले 27 टेस्ट मध्यक्रम में खेलने के बाद सलामी बल्लेबाज के रूप में उतरे रोहित शर्मा अब ग्रीम स्मिथ, वीरेंद्र सहवाग, ग्राहम गूच, क्रिस गेल, सनथ जयसूर्या और मर्वन अटापट्टू जैसे अपने जमाने के दिग्गज ओपनरों की सूची में शामिल हो गये हैं जिन्होंने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत मध्यक्रम के बल्लेबाज के रूप में की थी।

रोहित पहले बल्लेबाज नहीं हैं जिन्हें मध्यक्रम से हटाकर शीर्ष क्रम में भेजा गया। ऐसे बल्लेबाजों की लंबी फेहरिस्त है जिनमें कई बेहद सफल भी रहे हैं। आइये उन खिलाड़ियों पर एक नजर डालते हैंं जिन्होंंने अपने करियर की शुरुआत बतौर मध्यक्रम बल्लेबाज की थी लेकिन बाद में एक सफल ओपनर बनें:

वीरेंदर सहवाग

वीरेंदर सहवाग

भारत से इनमें सहवाग का नाम आता है जिन्होंने अपने पहले पांच टेस्ट मध्यक्रम के बल्लेबाज के रूप में खेले और पदार्पण टेस्ट में शतक भी जड़ा था। लेकिन जब उन्हें सलामी बल्लेबाज के रूप में उतारा गया तो फिर उन्होंने अपने आखिरी टेस्ट तक यह जिम्मेदारी निभायी और इस बीच कई धमाकेदार पारियां भी खेलीं जिनमें दो तिहरे शतक भी शामिल हैं। सहवाग ने ओपनर के तौर पर 8207 रन बनाये हैं।

ग्रीम स्मिथ

ग्रीम स्मिथ

दक्षिण अफ्रीका के सबसे सफल सलामी बल्लेबाज ग्रीम स्मिथ भी पहले दो टेस्ट मैचों में तीसरे और चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिये उतरे थे, लेकिन वह मूल रूप से ओपनर थे और उन्होंने 205 में से 196 पारियां ओपनर के रूप में खेलकर 9030 टेस्ट रन बनाये थे।

ग्राहम गूच और माइकल एथरटन

ग्राहम गूच और माइकल एथरटन

इस सूची में ग्राहम गूच, माइकल एथरटन का नाम चौंकाने वाला हो सकता है। गूच पहले दो टेस्ट में पांचवें नंबर पर उतरे थे लेकिन चार पारियों में केवल 37 रन बना पाये। इसके बाद वह तीन साल तक टीम से बाहर रहे और फिर उन्होंने सलामी बल्लेबाज के रूप में सफल वापसी की थी। गूच के साथी एथरटन भी पहले दो टेस्ट मैचों में वनडाउन पर खेले थे और नाकाम रहने के कारण उन्हें अगला मैच दस महीने बाद खेलने को मिला था लेकिन तब उन्हें सलामी बल्लेबाज बनाया गया था जिसमें वे सफल रहे।

क्रिस गेल और नवजोत सिंह सिद्धू

क्रिस गेल और नवजोत सिंह सिद्धू

क्रिस गेल ने पहले तीन टेस्ट मध्यक्रम में खेले और उनमें केवल 59 रन बनाये। इसके बाद उन्हें सलामी बल्लेबाज की जिम्मेदारी सौंपी गयी। भारत के नवजोत सिद्धू ने भी अपने टेस्ट करियर की शुरुआत मध्यक्रम के बल्लेबाज के रूप में की थी। हालांकि बाद में वह सचिन तेंदुलकर के साथ मुख्य ओपनर के तौर पर शुमार हुये।

सनथ जयसूर्या और मार्वन अटापट्टू

सनथ जयसूर्या और मार्वन अटापट्टू

मध्यक्रम से शीर्ष क्रम में पहुंचकर सफल ओपनर बनने वाले खिलाड़ियों में श्रीलंका के जयसूर्या और अटापट्टू प्रमुख हैं। जयसूर्या ने 14 टेस्ट निचले मध्यक्रम में खेले थे जिनमें वह केवल 591 रन बना पाये थे। इसके बाद उन्होंने ओपनर की भूमिका निभायी और 110 मैचों में 90 टेस्ट में यह जिम्मेदारी बखूबी संभाली। अटापट्टू की कहानी बड़ी रोचक है। उन्होंने चार साल के अंतर में तीन टेस्ट में छठे और सातवें नंबर पर बल्लेबाजी की और छह पारियों में केवल एक रन बनाया। इसके बाद तीसरे नंबर के बल्लेबाज के रूप में वापसी की पर नाकाम रहे। अटापट्टू ने 13 पारियां खेलने के बाद सलामी बल्लेबाज का जिम्मा संभाला और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। रिकार्ड के लिये बता दें कि उनके नाम पर ओपनर के तौर पर छह दोहरे शतक दर्ज हैं।

डीन एल्गर और हर्शल गिब्स

डीन एल्गर और हर्शल गिब्स

दक्षिण अफ्रीका के वर्तमान सलामी बल्लेबाज डीन एल्गर अपने पहले सात टेस्ट मैच में अक्सर छठे और सातवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिये उतरे। वह श्रीलंका के खिलाफ 2014 में गॉल में पारी का आगाज करने उतरे और 103 रन बनाये। इसके बाद से वह लगातार ओपनर बने हुए हैं। उन्हीं के देश के हर्शल गिब्स पहले सात टेस्ट तक मध्यक्रम में खेलते रहे और फिर जाकर उन्हें सलामी बल्लेबाज बनाया गया।

जस्टिन लैंगर और बॉबी सिम्पसन

जस्टिन लैंगर और बॉबी सिम्पसन

ऑस्ट्रेलिया के जस्टिन लैंगर लंबे समय तक तीसरे नंबर के बल्लेबाज बने रहे लेकिन बाद में उन्होंने मैथ्यू हेडन के साथ सफल सलामी जोड़ी बनायी थी। ऑस्ट्रेलिया के ही बॉबी सिम्पसन शुरू में छठे से आठवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिये उतरे लेकिन बाद में सलामी बल्लेबाज के रूप में सफल रहे।

डेनिस एमिस और माइकल वॉन

डेनिस एमिस और माइकल वॉन

इंग्लैंड के डेनिस एमिस ने पहले नौ टेस्ट मध्यक्रम में खेले थे जबकि माइकल वान ने 13 टेस्ट मध्यक्रम में खेलने के बाद सलामी बल्लेबाज की जिम्मेदारी निभायी थी।

Watch video: जब हरमनप्रीत के लिए रोड्रिगेज और हर्लिन ने गाया खास रैप सॉन्ग, जानें क्यों

रोहित ने इससे पहले 27 टेस्ट मैचों में मध्यक्रम में बल्लेबाजी की थी जिनमें वह केवल तीन शतक लगा पाये थे। यह सही है कि सलामी बल्लेबाज के रूप में उनकी असली परीक्षा विदेशों में होगी लेकिन तब तक वे मानसिक रूप से यह जिम्मेदारी संभालने के लिये पूरी तरह तैयार हो जाएंगे।

उन्होंने कहा,'मुझे दो साल पहले बताया गया था कि किसी चरण में मुझे पारी का आगाज करने के लिये कहा जा सकता है। इसलिए मैं भले ही टेस्ट में नहीं खेल रहा था लेकिन नेट्स पर नयी गेंद का सामना करता था।'

मोहम्मद शमी ने मचाया तहलका, इस खास मामले में कपिल के बराबर पहुंचे

रोहित शर्मा पिछले 6 साल से भी अधिक समय से सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारत के लिये पारी की शुरुआत करते हैं लेकिन टेस्ट में उसके काफी उलट था। वर्षों पहले वीरेंदर सहवाग पर किये गये प्रयोग से प्रेरणा लेकर रोहित को टेस्ट मैचों में भी यह जिम्मेदारी सौंपी गयी जिसमें वह पहली परीक्षा में सफल रहे। उन्होंने 176 और 127 रन की पारियां खेलकर कई नये रिकार्ड अपने नाम लिखवाये।

For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

क्रिकेट से प्यार है? साबित करें! खेलें माईखेल फेंटेसी क्रिकेट

Story first published: Monday, October 7, 2019, 18:05 [IST]
Other articles published on Oct 7, 2019
POLLS
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Mykhel sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Mykhel website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more