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जब एडमिशन से किया इंकार तो इस महिला क्रिकेटर ने लड़का बन ली ट्रेनिंग, जानिये कौन यह खिलाड़ी

नई दिल्ली। आज के समय में जहां लड़के और लड़कियां एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिला कर हर क्षेत्र में नाम कमा रहे हैं वहीं भारतीय महिला क्रिकेट टीम में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाली शेफाली वर्मा को शुरुआती समय में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शेफाली को क्रिकेट की ट्रेनिंग के लिए समाज में होने वाले लैंगिक भेद-भाव का शिकार होना पड़ा लेकिन बावजूद इसके शेफाली ने हार नहीं मानी और हालात से लड़कर खुद को साबित किया और भारत के लिए सबसे कम उम्र में खेलने वाली महिला खिलाड़ी बन गई। शेफाली वर्मा शुरू से ही अपने खेल को लेकर बहुत जुनूनी रही। मंगलवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 51 रनों की जीत में अहम योगदान देने वाली शेफाली वर्मा ने क्रिकेट की ट्रेनिंग लेने के लिए वो काम किया जिसको जानकर उनकी प्रतिभा के साथ ही उनके साहस के प्रति भी सम्मान जाग उठता है। रोहतक की रहने वाली शेफाली वर्मा के शहर में कोई क्रिकेट अकादमी न हो के कारण उन्हें बाहर जाकर एडमिशन लेना पड़ा, हालांकि यह उनके लिए बिल्कुल भी आसान काम नहीं था।

पिता के कहने पर लड़कों की तरह कटवाये बाल

पिता के कहने पर लड़कों की तरह कटवाये बाल

रोहतक की सभी क्रिकेट अकादमियों ने यह कहकर शेफाली को एडमिशन देने से इंकार कर दिया कि वह लड़की हैं। अपने खेल के प्रति समर्पित शेफाली ने इससे हार नहीं मानी और अपने पिता संजीव वर्मा के कहने पर अपने बाल लड़कों की तरह कटवाकर एक लड़के की तरह अकादमी में एमडिशन ले लिया।

शेफाली के पिता पेशे से ज्वैलर हैं। संजीव ने बताया,' रोहतक में लड़कियों के लिये कोई क्रिकेट एकादमी नहीं थी और सिर्फ लड़की होने के चलते कोई भी क्रिकेट एकादमी उसे एडमिशन नहीं दे रही थी। मैंने उनसे भीख मांगी कि उसे ऐडमिशन दे दें, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।'

संजीव वर्मा ने बताया, 'मैंने कई क्रिकेट एकैडमी का दरवाजा खटखटाया, लेकिन हर जगह रिजेक्शन मिला। तब मैंने अपनी बेटी के बाल कटवाये और उसे एक क्रिकेट एकैडमी ले गया जहां एक लड़के की तरह उसका ऐडमिशन कराया। मैं काफी डरा हुआ था, लेकिन खुशकिस्मती से किसी ने नोटिस नहीं किया। 9 से कम उम्र में सारे बच्चे एक जैसे ही लगते हैं।'

लड़कों के साथ खेला क्रिकेट, चोट लगी पर नहीं मानी हार

लड़कों के साथ खेला क्रिकेट, चोट लगी पर नहीं मानी हार

संजीव ने बताया कि लड़कों की टीम में खेलते हुए शेफाली को कई बार चोट लगती थी लेकिन उसके चलते वह रुकी नहीं बल्कि क्रिकेट के प्रति उसका जुनून और बढ़ता गया। हालांकि, स्थितियां बदलीं जब उसके स्कूल ने लड़कियों के लिए क्रिकेट टीम बनाने का फैसला किया।

संजीव ने कहा, 'लड़कों के खिलाफ खेलना आसान नहीं था क्योंकि अक्सर उसकी हेलमेट में चोट लगती थी। कुछ मौकों पर, बॉल उसके हेलमेट ग्रिल पर भी लगती थी। मैं डर जाता था, लेकिन उसने हार नहीं मानी।'

अपने डेब्यू मैच में सिर्फ 4 गेंद खेल पाने के बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शेफाली ने जबरदस्त वापसी की और महज 33 गेंद में 46 रन बना डाले, जिसके बाद हर तरफ उनकी बल्लेबाजी की तारीफ हो रही है। डेनियर वायट और मिथाली राज ने तो उन्हे अगला सुपरस्टार तक बता दिया है।

सचिन तेंदुलकर से मिली प्रेरणा

सचिन तेंदुलकर से मिली प्रेरणा

शेफाली ने बताया कि क्रिकेट को लेकर उनके मन में जुनून तब जागा 2013 में उन्होंने सचिन तेंदुलकर को अपना आखिरी रणजी मैच खेलते हुए हरियाणा में देखा था। उस वक्त 9 साल की शेफाली चौधरी बंसी लाल क्रिकेट स्टेडियम में अपने पिता के साथ बैठी सचिन-सचिन के नारे लगा रही थी।

शेफाली ने कहा, 'अपने पहले मैच में डक हो जाने के बाद मैं थोड़ा रिलैक्स महसू कर रही थी। सीनियर प्लेयर्स मेरे पहले मैच के बाद मुझे सपॉर्ट कर रहे थे और मुझे खुशी है कि मैंने टीम की जीत में योगदान दिया।'

दिग्गज खिलाड़ी हो रहे फैन, ऐसे कराया आलोचकों का मुंह बंद

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शेफाली ने इस साल घरेलू सीजन में भी जबरदस्त प्रदर्शन किया और 6 शतक,3 अर्धशतक की मदद से 1923 रन बनाये। शेफाली अभी 10वीं क्लास में पढ़ती हैं। शेफाली ने अपने पिता से कहा था कि जो रिश्तेदार और समाज मेरे खेलने की वजह से मेरे परिवार को ताने दे रहा है एक दिन मेरे नाम के नारे लगायेगा और यकीन मानिये कुछ ऐसा ही हो रहा है।

आपको बता दें कि मौजूदा सीरीज में भारतीय महिला टीम ने दक्षिण अफ्रीका को 3-0 से हराकर 6 मैचों की सीरीज में अजेय बढ़त बना ली है। बारिश के चलते दो मैच धुल जाने के बाद सीरीज पांच की बजाय 6 मैचों की कर दी गई।

Story first published: Thursday, February 27, 2020, 13:48 [IST]
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