शतरंज के खेल ने बदल दिया चहल का क्रिकेट, पहले ही चाल खेलकर गिरा देते हैं विकेट
नई दिल्ली। विश्व कप शुरू होने से काफी समय पहले ही टीम इंडिया ने इस महाप्रतियोगिता के लिए एक बड़ी तैयारी कर ली थी। ये तैयारी कोई एक दिन में नहीं हुई थी। इसमें समय लगा और कुछ कठिन फैसले भी लेने पड़े। अततः भारतीय वनडे टीम में कलाई के स्पिनरों का दौर लाया गया जिसका नतीजा देश को दो बेहतरीन कलाई के जादूगरों कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल के रूप में देखने को मिला। विश्व कप में ये दोनों भारत के ट्रंप कार्ड माने जा रहे हैं और पहले मैच में चहल ने चार विकेट लेकर ये साबित भी कर दिया है कि ये विश्व कप भी कलाई के स्पिनरों का होने वाला है।

शतरंज खेलकर बने 'शातिर'
आखिर ऐसी क्या चीज है जो कलाई के स्पिनरों को इतना खास बनाती है? ये तो सब ही जानते हैं कि ऐसे स्पिनर आमतौर पर अंगुली के स्पिनर्स की तुलना में ज्यादा घुमाव हासिल करते हैं। लेकिन इसके अलावा भी अन्य कई बातें है जो इनको खास बनाती है। चहल को क्या खास बनाता है उसका जवाब इन्होंने खुद मैच के बाद दिया। चहल ने कहा, 'शतरंज के खेल ने मुझे धैर्य रखना और योजना बनाना सिखाया है। जब आप चैस खेलते हैं तो 15-16 चालें पहले ही सोचकर रख लेते हैं। ठीक ऐसे ही फाफ डु प्लेसिस जैसे खिलाड़ी को गेंद करते हुए आपको पहले ही अपनी योजना बनानी होती है।'

एक विकेट के तरीके अनेक-
अमूमन ऐसी योजनाओं में ये शामिल होता है कि उक्त बल्लेबाज को कौन सी गेंद गुगली करनी है, कौन सी प्लिपर या कौन सी टॉप स्पिन। चहल के तरकश में ये सारे तीर हैं जिनका इस्तेमाल वे बल्लेबाज के बैटिंग स्टाइल के हिसाब से करते हैं। योजना बनाकर विकेट लेने का मजा कुछ और ही होता है। चहल इस पर कहते हैं, 'जिस तरह से मैंने फाफ डु प्लेसिस को आउट किया उससे मैं काफी खुश हूं।'

चहल-बुमराह की जोड़ी से भी मिलिए-
लेकिन गेंदबाज कितना भी बड़ा क्यों ना हो उसको दूसरे छोर से भी उतना ही सपोर्ट चाहिए होता है। इस मामले में चहल भाग्यशाली हैं कि भारत के पास जसप्रीत बुमराह जैसा दुनिया का आला गेंदबाज है जो पहले ही स्पैल में आकर बल्लेबाजों को इतना आतंकित कर देता है कि बाद में स्पिनरों के लिए दबाव का फायदा उठाना आसान हो जाता है। चहल भी इस बात को बखूबी समझते हैं और कहते हैं, 'मैं हमारे तेज गेंदबाजों को श्रेय देना चाहूंगा कि उन्होंने मेरे और कुलदीप के लिए बहुत अच्छा गेम सेट करके दिया। हमारे ऊपर काफी कम दबाव था।'
8वें नंबर के बल्लेबाज नाथन कुल्टर-नाइल ने विश्व कप में खेली ऐतिहासिक पारी
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