धोनी के 'ग्लव्स विवाद' के बाद ट्विटर पर क्यों वायरल हो रहा है #DhoniKeepTheGlove

CWC19: #DhoniKeepTheGlove gone viral on twitter in support for MS Dhoni

नई दिल्ली। धोनी के दस्तानों पर अंकित भारतीय पैरा स्पेशल फोर्स का निशान 'बलिदान बैज' देश में राष्ट्रीय सम्मान और गौरव का एक विषय बन गया है। इसको लेकर भले ही आईसीसी और बीसीसीआई के बीच संशय की स्थिति भी पैदा हो गई है। लेकिन देश भर से धोनी के पक्ष में एक ही आवाज उठ रही है कि धोनी आप अपने ये कीपिंग गलव्स विश्व कप में पहने रहिए। गौरतलब है कि जब भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए मुकाबले में धोनी के दस्ताने पर बना हुआ 'बलिदान बैज' कैमरों की पकड़ में आया तब से ही इस मामले ने तूल पकड़ा हुआ है।

इस निशान को देखने के बाद आईसीसी ने बीसीसीआई से अनुरोध किया था कि इस निशान को हटा लिया जाए क्योंकि आईसीसी अपने टूर्नामेंट में किसी भी खिलाड़ी को ऐसा निशान धारण करने की छूट नहीं देता जिसका संबधी किसी राजनीतिक, धार्मिक, नस्लीय, सैन्य या फिर व्यवसायिक महत्ता से है।

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इस पर बीसीसीआई के सीओए चीफ विनोद राय ने धोनी का पक्ष रखते हुए साफ कहा है, 'आईसीसी के नियमों के मुताबिक कोई खिलाड़ी ऐसा निशान नहीं पहन सकता है जिसकी कोई राजनीतिक, धार्मिक, नस्लीय, सैन्य या फिर व्यवसायिक महत्ता है। इस केस में धोनी का 'बलिदान बैज' किसी भी उपरोक्त श्रेणी में नहीं आता है। इसलिए अब हम आईसीसी को बताने जा रहे है कि इसको हटाने की कोई जरूरत नहीं है।' आपको बता दें कि धोनी को 2011 में टेरीटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि से नवाजा गया था। उसके बाद साल 2015 में धोनी ने पैरा फोर्सेज के साथ बुनियादी ट्रेनिंग और फिर पैराशूट से कूदने की स्पेशल ट्रेनिंग भी पूरी की जिसके बाद धोनी को पैरा रेजिमेंट में शामिल किया गया और उन्हें ये बैज लगाने की अनुमति दी गई।

सोशल मीडिया पर धोनी के पक्ष में 'धोनी कीप्स द ग्लव्स' (धोनी गलव्स पहने रखिए) हैशटैग अभियान छा गया है। इसको लेकर विभिन्न तरह के ट्वीट्स की बाढ़ आ गई है। एक तरह ये विश्व कप देश में राष्ट्रीयता की एक नई जोशीली भावना को भी अपने में उमेड़ लाया है। इन ट्वीट्स को आप यहां पर देख सकते हैं-

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Story first published: Friday, June 7, 2019, 20:52 [IST]
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