कामोत्तेजक दवा पर हुआ विवाद
वंदना
बीबीसी संवाददाता
राष्ट्रमंडल खेलों और विवादों का इन दिनों चोली-दामन का साथ हो गया है. नया विवाद एक कामोत्तजक उत्पाद को खेलों के साथ जोड़े जाने को लेकर हुआ है.
दरअसल अख़बारों में इन दिनों इश्तेहार छप रहा है जिसमें एक कंपनी कामोत्तजक उत्पाद का प्रचार कर रही है और साथ में दिल्ली 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स का लोगो छपा है.
यानी देखने वाला मतलब निकालेगा कि ये कंपनी आधिकारिक तौर से खेलों के साथ जुड़ी हुई है. विज्ञापन में बाकायदा लिखा गया है कि कंपनी स्वास्थ्य वर्धन के लिए आधिकारिक लाइसेंसधारक है.
विज्ञापन की टैगलाइन है- अनपेक्षित अनुभव (experience unexpected). ज़ाहिर है इसे लेकर बहस छिड़ गई है. राष्ट्रमंडल आयोजन समिति अब कंपनी को नोटिस भेजने जा रही है कि आख़िर उसने ऐसा क्यों किया.
फिर एक विवाद
उत्पाद बनाने वाली कंपनी कुन्नथ फ़ार्मास्यूटिकल्स के अधिकारी सैम्युल थॉम्सन ने बातचीत में स्वीकार किया है कि कंपनी स्वास्थ्य वर्धन के लिए खेलों की आधिकारिक लाइसेंसधारक है.
उन्होंने कहा, “इस मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है.प्रीमियर ब्रांड्स कंपनी को आधिकारिक तौर पर मर्चेन्डाइज़िंग का अनुबंध मिला था. उसी कंपनी ने हमें एक विशेष श्रेणी में आगे ये अनुबंध दिया है. हमारे पास कागज़ात भी हैं. राष्ट्रमंडल आयोजन समिति कह रही है कि वो ख़ुद को ऐसे उत्पाद से जोड़ना नहीं चाहती लेकिन वे बात को परिप्रेक्ष्य में नहीं रख रहे हैं.”
कंपनी का दावा है कि अनुबंध के तहत कॉमनवेल्थ खेलों का लोगो और शुभंकर शेरा को वो इस्तेमाल कर सकती है.
लेकिन सवाल ये है कि प्रीमियर ब्रांड्स तो राष्ट्रमंडल के साथ अपना अनुबंध रद्द कर चुकी है. अगर उसने आगे किसी को अनुबंध दिया है तो इस बात को कैसे देखा जाए.
सैम्युल थॉम्सन का कहना है कि उनकी कंपनी को प्रीमियर ब्रांड्स की ओर से अनुबंध रद्द होने की कोई सूचना नहीं दी गई है.
कंपनी का तो ये भी दावा है कि वो आगामी चैंपियंस लीग में श्रीलंका से जाने वाली वायंबा 11 टीम के ‘लीड स्पॉन्सर्स’ भी हैं.
कुन्नथ फ़ार्मास्यूटिकल्स का कहना है कि उन्हें राष्ट्रमंडल आयोजन समिति की ओर से कोई क़ानूनी नोटिस नहीं मिला है और अगर ऐसा होता है वो इसका उचित जवाब देंगे.
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