अनुभा रोहतगी
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
पर्यटकों के लिए दिल्ली की पहली हॉप-ऑन हॉप-ऑफ़ बस सेवा एक अक्तूबर से शुरु हो रही है.राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान दिल्ली की सड़कों पर सोमवार से अलग से एक लेन रखने से दिल्लीवासियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में परेशानी और देरी का सामना करना पड़ रहा है. इसी समस्या से इस दौरान आने वाले पर्यटकों को भी दो-चार होना पड़ेगा.
लेकिन दिल्ली पर्यटन की एमडी रीना रे मानती हैं कि इससे ज़्यादा दिक्कत नहीं होगी. उन्होंने ये बात दिल्ली की पहली 'हॉप ऑन हॉप ऑफ़' यानि 'होहो" बस सेवा के शुरु होने के अवसर पर कही.रीना रे ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, “ये प्रतिबंध सिर्फ़ दिल्ली में ही नहीं है. खेलों के लिए ख़ास लेन अलग रखना अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल का हिस्सा है जो मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेल और बीजिंग ओलंपिक्स के दौरान भी था. मुझे नहीं लगता कि कोई ज़्यादा मुश्किल होगी."
रीना रे ने कहा, “आज सुबह भी हमने देखा कि दिल्ली की जनता को इसकी आदत हो गई है और वो उन ख़ास लेन्स से बच कर निकल रहे हैं. साथ ही बहुत से लोगों ने मेट्रो का इस्तेमाल करना भी शुरु कर दिया है."
होहो बस सेवा
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इस सेवा को सोमवार को अपने निवासस्थान पर लॉन्च किया , अट्ठाईस से तीस सितम्बर तक इन बसों में कमज़ोर तबके के बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को मुफ़्त घुमाया जाएगा जबकि आम जनता के लिए ये सेवा एक अक्तूबर से शुरु होगी.इन वातानुकूलित बसों का इसका किराया व्यस्कों के लिए तीन सौ रुपये प्रति व्यक्ति और बच्चों के लिए डेढ़ सौ रुपये होगा. ये बसें पूरे साल सुबह आठ से शाम आठ बजे तक हर आधे घंटे पर चलेंगी.
पर्यटक अपनी सुविधानुसार बस के रुट पर कहीं भी चढ़ और उतर सकते हैं. दिल्ली के सभी महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल, शॉपिंग स्थल और होटल इत्यादि इस सेवा का हिस्सा होंगे. हालांकि ये सेवा राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान शुरु की गई है, लेकिन ये अगले दस साल तक जारी रहेगी.रीना रे कहती हैं, “जब आप कोई पैकेज टूर लेते हैं, तो आप उसके तय कार्यक्रम और समय से बंध कर रह जाते हैं. लेकिन इस बस सेवा की सबसे ख़ास बात ये है कि पर्यटक अब ये ख़ुद फ़ैसला लेंगे कि वो क्या देखना चाहते हैं क्या नहीं और कितनी देर तक देखना चाहते हैं."