पारंपरिक तौर पर चलन ये रहा है कि राष्ट्रमंडल की प्रमुख होने के नाते ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ खेलों का उदघाटन करती हैं. लेकिन उन्होंने मई में ही बता दिया था कि वे भारत नहीं आ पाएँगी और महारानी की जगह उनके बेटे प्रिंस चार्ल्स आएँगे.इसी को देखते हुए अब बहस इस बात को लेकर चल रही है कि आख़िर औपचारिक उदघाटन कौन करे.
जब बीबीसी ने इस बारे में राष्ट्रपति कार्यालय में बात की तो अधिकारी अर्चना दत्ता ने कहा कि अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है.उन्होंने कहा कि वो अटकलों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहतीं.मगर प्रिंस चार्ल्स के कार्यालय क्लेरेंस हाउस की एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया, "इस बात को लेकर तो कोई विवाद ही नहीं है. युवराज और भारत की राष्ट्रपति दोनों की ही दिल्ली में उदघाटन कार्यक्रम में अहम भूमिका होगी."
प्रवक्ता के अनुसार, "महारानी ने प्रिंस ऑफ़ वेल्स को राष्ट्रमंडल खेलों में उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए कहा है. कार्यक्रम में कब क्या होगा इसकी पूरी जानकारी तो अभी नहीं दी जा सकती मगर प्रिंस चार्ल्स महारानी का संदेश पढ़ेंगे और उस संदेश के अंत में खेलों को शुरू करने की घोषणा होगी."
कूटनीति क्या कहती है
वर्ष 1998 में जब मलेशिया में राष्ट्रमंडल खेल आयोजित हुए थे वहीं के राजा ने औपचारिक उदघाटन किया था. तब महारानी का प्रतिनिधित्व उनके बेटे एववर्ड ने किया था.इस मु्द्दे पर पूर्व राजनयिक सलमान हैदर का मानना है कि खेलों का आयोजन भारत में हो रहा है, इसलिए भारत की राष्ट्रपति को उदघाटन करना चाहिए. वे कहते हैं, “इसमें विवाद का कोई सवाल ही नहीं है न ही कोई कूटनीतिक मामला है. जब भारत की राष्ट्रपति मौजूद रहेंगी तो उदघाटन उन्हीं को करना चाहिए, हाँ अगर महारानी आ रही होती तो सोचना पड़ता कि क्या करना होगा."
कुछ दिन पहले बीबीसी से बातचीत में खेल मंत्री एमएस गिल ने कहा था कि इस बारे में फ़ैसला मंत्रीसमूह लेगा.राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रिंस चार्ल्स शनिवार को भारत पहुँचे और पाँच दिन तक रहेंगे.