दरअसल प्रशांत कर्माकर पश्चिम बंगाल खेल मंत्रालय के रवैए से काफ़ी नाराज़ हैं. गुरुवार को पैरा-स्पोर्ट्स में तैराकी में पदक जीतकर नया इतिहास रचने वाले कर्माकर का कहना है कि खेल मंत्रालय ने उनके साथ 'सौतेला व्यवहार' किया है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 के एशियन चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतने के बावजूद खेल विभाग ने उनके अनदेखी की. इसके कारण अपनी एक हथेली दुर्घटना में गँवाने वाले कर्माकर हरियाणा चले गए.
समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ बातचीत में कर्माकर ने कहा, "मैंने अपना रजत पदक उस समय के खेल मंत्री सुभाष चक्रवर्ती को दिखाया था. घंटों इंतज़ार के बाद हमें उनसे मिलने का मौक़ा मिला. उन्होंने इसे अच्छी उपलब्धि तो कहा लेकिन कोई भी सहयोग के लिए आगे नहीं आया."
उन्होंने कहा कि इस व्यवहार के बाद वे अपने को बंगाली तैराक कहलाने में शर्म महसूस करते हैं. प्रशांत ने कहा,"मैं हरियाणा का प्रतिनिधित्व करने में गर्व महसूस कर रहा हूँ. जहाँ मुझे ख़ूब समर्थन मिला." उन्होंने कहा कि पैरा-एथलीटों के लिए कोई नौकरी भी नहीं होती. प्रशांत ने उम्मीद जताई कि उनकी जीत के बाद सभी पैरा एथलीटों को नौकरी मिलेगी.