चेन्नई टेस्ट : सहवाग के बूते जीत की राह चला भारत (राउंडअप)
चौथे दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने सहवाग (83) और गौतम गंभीर (नाबाद 41) की शानदार पारियों की बदौलत एक विकेट के नुकसान पर 131 रन बना लिए। अब उसे जीत के लिए 256 रनों की जरूरत है जबकि उसके पास पूरे एक दिन का समय और नौ विकेट शेष हैं।
रविवार को पहले सत्र में जब इंग्लैंड ने एंड्रयू स्ट्रॉस (108) और पॉल कोलिंगवुड (108) के बीच हुई 214 रनों की साझेदारी की बदौलत 350 रनों से अधिक की बढ़त हासिल कर ली, तभी से भारतीय खिलाड़ियों की उम्मीदें सहवाग पर टिक गईं।
यह कहने में कोई हर्ज नहीं कि किसी टूटती विकेट पर चौथी पारी में 350 रन से अधिक का लक्ष्य हासिल कर पाना बहुत कठिन काम है लेकिन भारत के पास सहवाग के रूप में एक ऐसा तुरुप का पत्ता है जो नामुमकिन को मुमकिन बनाना जानता है। पिच टूटी हो या फिर बिल्कुल ताजी हो, सहवाग अगर लय में हों तो विपक्षी गेंदबाजों की गेंदों की दिशा और लंबाई बलि चढ़ जाती है।
इंग्लैंड ने चायकाल के ठीक बाद मैट प्रॉयर का विकेट गिरते ही नौ विकेट पर 311 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। इसके बाद सहवाग की बारी थी। उन्होंने एकदिवसीय क्या ट्वेंटी-20 शैली में खेलते हुए महज 32 गेंदों में 50 रन बना डाले। हालांकि इसके बाद उन्हें अपनी बढ़ती जिम्मेदारी का एहसास हुआ और इस कारण उनकी रफ्तार थोड़ी कम हो गई। सहवाग ने 68 गेंदों की पारी में 11 चौके और चार छक्के लगाए।
एक तरफ सहवाग ताबड़तोड़ शैली में रन बटोर रहे थे, वहीं दूसरी ओर गंभीर मूकदर्शक बनकर एक-एक रन के जरिए अपनी टीम को योगदान दे रहे थे। 117 रनों के कुल योग पर जब सहवाग बिदा हुए, तब तक भारत मैच जीतने के बारे में सोचने की स्थिति में पहुंच चुका था। मुश्किल लक्ष्य अब पकड़ में दिखने लगा था और यही कारण है कि गंभीर और राहुल द्रविड़ ने संभलकर खेलते हुए दिन की समाप्ति तक कोई और नुकसान नहीं होने दिया।
इससे पहले, इंग्लैंड की टीम ने नौ विकेट पर 311 रन बनाकर अपनी दूसरी पारी घोषित कर दी। पहली पारी के आधार पर उसे 75 रनों की बढ़त मिली थी। पहली पारी में उसने 316 रन बनाए थे जबकि भारतीय टीम अपनी दूसरी पारी में 241 रन ही बना सकी थी।
चायकाल तक आठ विकेट पर 301 रन बनाने वाली इंग्लैंड की टीम ने चायकाल के बाद मैट प्रॉयर (33) का विकेट गंवाया और इसी के साथ इंग्लैंड के कप्तान केविन पीटरसन ने पारी घोषित कर दी। पहले सत्र में भारतीय गेंदबाज एक भी विकेट हासिल नहीं कर सके। यही वह सत्र था जब इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने भारत के लिए सबसे अधिक मुश्किलें खड़ी कीं।
भोजनकाल के बाद सबसे पहला विकेट दोनों पारियों में शतक लगाने का कारनामा करने वाले सलामी बल्लेबाज एंड्रयू स्ट्रॉस के रूप में गिरा। वे 108 रन बनाकर हरभजन सिंह के शिकार बने। स्ट्रॉस ने 244 गेंदें खेलकर आठ चौके लगाए।
इसके बाद हरफनमौला एंड्रयू फ्लिंटॉफ (4) कुछ खास नहीं कर सके और पांचवें विकेट के तौर पर बिदा हुए। फ्लिंटॉफ को ईशांत शर्मा ने विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी के हाथों कैच कराया। इंग्लैंड को छठा झटका पॉल कोलिंगवुड के रूप में लगा। स्ट्रॉस के साथ चौथे विकेट के लिए 214 रनों की बेशकीमती साझेदारी को अंजाम दिया।
इसके बाद जहीर खान ने इंग्लैंड को लगातार दो झटके देते हुए ग्रीम स्वान (7) और स्टीव हार्मिसन (1) को चलता किया। भारत की ओर से जहीर और ईशांत ने तीन-तीन विकेट लिए जबकि हरभजन, अमित मिश्रा और युवराज सिंह ने भी एक-एक विकेट लिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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