आ रहीं थी खून की उल्टियां, लेकिन युवराज बोले- देश को वर्ल्ड कप जिताना है
नई दिल्ली। 10 जून 2019 का दिन कभी ना भूला पाने वाला रहेगा। वो इसलिए, क्योंकि इस दिन 'सिक्सर किंग' युवराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेते हुए अपने फैंस की आंखें नम कर दीं। युवराज भले संन्यास ले चुके हों लेकिन उनकी उपलब्धियों को भूलाना ना के बराबर है। उनके लिए सबसे बड़ा दिन वो रहा जब भारत ने फाइनल में श्रीलंका को हराकर आईसीसी विश्व कप 2011 का खिताब जीता था। इस खिताब को दिलाने के लिए जो कष्ट, जो हिम्मत युवराज ने रखी वो शायद ही अन्य क्रिकेटर रख सके। युवराज को 2011 वर्ल्ड कप के दाैरान मैदान पर उल्टियां आ रही थीं, लेकिन उनकी जुबां पर फिर भी यही शब्द थे- देश को वर्ल्ड कप जीताना है।

उल्टियां आने के बाद भी डटे रहे क्रीज पर
जी हां, ये दर्दनाक पल उस समय के हैं जब युवराज कैंसर से लड़ रहे थे। लेकिन तब उनके कंधों पर भारत को खिताब दिलाने का जिम्मा भी था। लिहाजा इस हिम्मत भरे खिलाड़ी ने कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को दरकिनार कर खेलना जरूरी समझा। टूर्नामेंट के दाैरान विंडीज के खिलाफ मैच से पहले युवराज को चक्कर आ रहे थे। उन्हें खून की उल्टियां भी आईं। इसके बाद सभी ने उन्हें ना खेलने की सलाह दी लेकिन युवराज ने खेलने का फैसला लिया। वह मैच में उतरे। बल्लेबाजी के दाैरान उन्हें फिर उल्टियां हुईं। ऐसे में तब मैदानी अंपायर ने उनसे पूछा कि क्या आप मैदान छोड़कर जाना चाहेंगे तो युवराज ने जवाब दिया अगर मैं मैदान पर गिर जाऊं या बेहोश हो जाऊं तो आप मुझे हॉस्पिटल भेज सकते हैं, लेकिन तब तक मैं विकेट छोड़कर कहीं नहीं जा रहा। मुझे देश को वर्ल्ड कप जीताना है।

फिर लगाया शतक
यह कहने के बाद युवराज क्रीज पर डटे रहे। उन्होंने 113 रनों की शतकीय पारी खेली और टीम का स्कोर 268 तक पहुंचाया। युवराज इतने पर ही नहीं रूके उन्होंने 4 ओवर गेंदबाजी भी की और वेस्टइंडीज के दो बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाते हुए भारत की जीत सुनिश्चित की। भारत ने इस मैच को 80 रनों से जीता और युवराज सिंह को उनके शानदार खेल के लिए मैन ऑफ द मैच खिताब से नवाजा गया। इसके बाद ही युवराज सिंह ने मैदान छोड़ा।
संन्यास के बाद युवराज सिंह ने बताया वो सपना जो रह गया अधूरा

किताब में लिखा हिम्मत भरा संदेश
सचिन तेंदुलकर, विरेंद्र सहवाग और महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ियों ने युवराज को वर्ल्ड कप ना खेलने की सलाह दी लेकिन युवराज ने हिम्मत ना हारते हुए देश के लिए खेलने का अंतिम फैसला लिया। कई खिलाड़ी जो मैदान पर गए वह बताते हैं कि युवराज यही बोल रहा था कि भारत को जीताना है और भारत को विश्वकप दिलाना है वापिस नहीं जाऊंगा। उन्होंने अपने कैंसर की पूरी लड़ाई को 2013 में अपनी लिखी हुई किताब 'द टेस्ट ऑफ माई लाइफ' में बयां किया है। उन्होंने किताब में लिखा है- कोई भी बीमारी आपको अंदर से तोड़ने के लिए काफी होती । आप चारों ओर निराशा से भर जाते हैं। लेकिन, आपको निराश होने की जगह उससे डट कर लडऩे की जरूरत है। बीमारी के समय आपके भविष्य को लेकर जो मुश्किल सवाल आपके मन में आते हैं, उसका आपको सामना करना चाहिए। उससे पीछे भाग कर आपके अंदर और भी निराशा ही आएगी। बता दें कि युवराज के शानदार खेल की मदद से भारत ने 2011 का क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता था। इस दौरान युवी को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी दिया गया। उन्होंने 9 मैचों में 362 रन बनाए और 15 विकेट लिए।
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