क्या विराट कोहली महेन्द्र सिंह धोनी के बिना आधे कप्तान हैं?
नई दिल्ली। IPL-2019 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू की लगातार हार क्रिकेट का बड़ा अचंभा है। जिस टीम में विराट कोहली और एबी डिविलियर्स जैसे धुरंधर हों वह टीम आठ में से सात मैच हार जाए तो दिमाग का चकराना लाजिमी है। कोहली जब भारतीय टीम की कप्तानी करते हैं तो जीत कदम चूमने को बेताब रहती है। लेकिन आइपीएल में तो माजरा ही उलटा है। ऐसा नहीं है कि बेंगलुरु की टीम में काबिल खिलाड़ियों की कमी है, लेकिन मैदान पर खिलाड़ी परफाॅर्म नहीं कर पा रहे रहें। विश्वकप क्रिकेट के ठीक पहले कोहली का यह प्रदर्शन उनके मनोबल पर असर डाल सकता है। अब यह भी सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या कोहली, महेन्द्र सिंह धोनी के बिना आधे कप्तान हैं ? क्या सीमित ओवरों के मैच में कोहली की कामयाबी धोनी के टिप्स पर निर्भर है? IPL की अंकतालिका में धोनी जहां सबसे ऊपर बने हुए हैं वहीं कोहली इस सूची में फिसड्डी हैं।

खराब फील्डिंग ने लुटिया डुबोयी
बेंगलुरू की टीम, बैटिंग, बॉलिंग में तो फिसड्डी साबित हो ही रही है, फील्डिंग में भी उसने नाक कटा ली है। कैच छोड़ने की वजह से आरसीबी अधिकतर मौके गंवाती रही है। आरसीबी पहले छह मुकाबले लगातार हारी। इन छह मैचों में कोहली की टीम ने 14 कैच टपकाए। टी-20 क्रिकेट में इससे अधिक आत्मघाती कुछ और नहीं हो सकता। 20 ओवरों के मैच में जब एक बल्लेबाज को जीवनदान मिलता है तो इसकी कीमत गेंदबाजों को चुकानी पड़ती है। जीवनदान पाया बल्लेबाज जो भी रन बनाता है वह उसकी टीम के लिए बोनस होता है। किसी टीम की जीत में बैटिंग और बॉलिंग की तरह फील्डिंग बहुत अहमियत रखती है। कैच से ही मैच जीते जाते हैं।
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क्या गेंदबाजी कमजोर है?
आरसीबी की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मैच जीत सकती थी। 205 का स्कोर बना कर कोई भी टीम ये उम्मीद कर सकती है कि उसके गेंदबाज इस टोटल की रक्षा करेंगे। आरसीबी के गेंदबाज ऐसा करते दिखे भी लेकिन आंद्रे रसेल के सुनामी में दिग्गज भी पत्ते की तरह उड़ गए। टीम साउदी को दुनिया का बेहतरीन तेज गेंदबाज माना जाता है। वे न्यूजलैंड के स्ट्राइक गेंदबाज हैं। लेकिन जब दिन खराब होता हो तो आंकड़े किसी काम के नहीं रहते। साउदी के 19 वें ओवर में रसेल ने चार छक्के और एक चौका जड़ कर मैच कोलकाता के नाम कर दिया। कोहली की टीम जो कुछ देर तक पहले जीत की दहलीज पर खड़ी थी, अचानक हार बैठी। आरसीबी की टीम में यजुवेन्द्र चहल, पवन नेगी, मोइन अली, मार्कस स्टोइनिस और उमेश यादव जैसे गेंदबाज हैं। इनकी क्षमता पर किसी को संदेह नहीं। लेकिन आइपीएल के इस सीजन में इनकी गेंदें कमाल नहीं दिखा पा रही हैं।

बैटिंग के लिए कोहली और डिविलियर्स पर निर्भर
आरसीबी की टीम रनों के लिए पूरी तरह कोहली और डिविलियर्स पर निर्भर है। मिडिल ऑर्डर अब तक फेल ही रहा है। जब डेथ ओवरों में तेज रन बनाने की दरकार होती है तो कोई बल्लेबाज यह जिम्मेवारी नहीं उठाता। मार्कस स्टोइनिस आस्ट्रेलिया के लिए ये काम बखूबी करते रहे हैं। इसी काबिलियत को देख कर उनको टीम में शामिल गया है। लेकिन वे इस काम को अब तक अंजाम नहीं दे पाये हैं। इसी तरह वेस्टइंडीज के हेटमायर और न्यूजीलैंड के ग्रैंडहोम को भी तेज बल्लेबाजी के लिए चुना गया है। मौके पर वे भी फेल हो जा रहे हैं। मुम्बई के खिलाफ जब बेंगलुरु को जीत के लिए 188 रन बनाने थे तो वह 181 के स्कोर ही ठहर गयी। इस मैच में हेटमायर 5 तो ग्रैंडहोम 2 रन बना कर चलते बने। आखिरी 9 गेंदों पर डिविलियर्स और शिवम दुबे वह कमाल नहीं दिखा सके जिसकी टीम उम्मीद कर रही थी। इस तरह बेंगलुरु करीबी मुकाबले में केवल छह रन से ये मैच हार गया। ऐसा शायद ही कभी हो कि डिविलियर्स नॉटआउट रहें और टीम मैच हार जाए।
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