
डटे रहे क्रीज पर
विंडीज के खिलाफ मैच से पहले युवराज को चक्कर आ रहे थे। मैडिकल टीम ने उन्हें ना खेलने की सलाह दी लेकिन युवराज ने खेलने का फैसला लिया। वह मैच में उतरे। बल्लेबाजी के दाैरान उन्हें खून की उल्टियां हुईं। ऐसे में तब मैदानी अंपायर ने उनसे पूछा कि क्या आप मैदान छोड़कर जाना चाहेंगे तो युवराज ने जवाब दिया- अगर मैं मैदान पर गिर जाऊं या बेहोश हो जाऊं तो आप मुझे हॉस्पिटल भेज देना, लेकिन तब तक मुझे देश को वर्ल्ड कप जीताना है।

जड़ा यादगार शतक
जीत का जज्बा साथ लेकर युवराज मुसीबतों के बीच क्रीज पर डटे रहे। उन्होंने 113 रनों की शतकीय पारी खेली और टीम का स्कोर 268 तक पहुंचाया। युवराज इतने पर ही नहीं रूके उन्होंने 4 ओवर गेंदबाजी भी की और वेस्टइंडीज के दो बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाते हुए भारत की जीत सुनिश्चित की। भारत ने इस मैच को 80 रनों से जीता और युवराज सिंह को उनके शानदार खेल के लिए मैन ऑफ द मैच खिताब से सम्मानित किया गया था।

फिर लिखी किताब
युवराज ने अपने कैंसर की पूरी लड़ाई को 2013 में अपनी लिखी हुई किताब 'द टेस्ट ऑफ माई लाइफ' में बयां किया है। उन्होंने किताब में हिम्मत भरा संदेश देते हुए लिखा है- कोई भी बीमारी आपको अंदर से तोड़ने के लिए काफी होती । आप चारों ओर निराशा से भर जाते हैं। लेकिन, आपको निराश होने की जगह उससे डट कर लडऩे की जरूरत है। बीमारी के समय आपके भविष्य को लेकर जो मुश्किल सवाल आपके मन में आते हैं, उसका आपको सामना करना चाहिए। उससे पीछे भाग कर आपके अंदर और भी निराशा ही आएगी। गाैर हो कि कि युवराज के शानदार खेल की मदद से भारत ने 2011 का क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता था। इस दौरान युवी को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी दिया गया। युवराज ने 9 मैचों में 362 रन बनाए और 15 विकेट चटकाए थे।


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