
सचिन ने खुद किया थी कप्तानी से हटाने की मांग
भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ सेलेक्टर रह चुके चंदू बोर्ड ने अपने इंटरव्यू में खुलासा किया कि सचिन तेंदुलकर खुद ही चयनकर्ताओं के पास पहुंचे थे और साफ किया था कि वह अब और अपनी कप्तानी को जारी नहीं रख सकते।
एक वेबसाइट को दिये बयान में उन्होंने कहा, ', अगर आपको याद हो तो हमने उन्हें कप्तान के तौर पर ऑस्ट्रेलिया भेजा गया था। उस दौरे पर सचिन ने कप्तानी तो की लेकिन जब वो वहां से लौटे तो टीम की कमान नहीं संभालना चाहते थे। सचिन ने कहा था कि वो अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान देना चाहते हैं। इसके बाद मैंने उनसे कहा था कि आप कुछ लंबे समय के लिए कप्तानी करें क्योंकि हमें नए कप्तान को ढूंढ़ना होगा।'

अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान देने के लिये छोड़ी कप्तानी
चंदू बोर्डे के अनुसार सचिन तेंदुलकर उस वक्त कप्तानी करने के चलते अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे और इसीलिये वह कप्तानी छोड़ना चाहते थे। उल्लेखनीय है कि सचिन तेंदुलकर ने भारत के लिये 73 वनडे मैच और 25 टेस्ट मैचों में कप्तानी की, जिसमें भारत ने सिर्फ 23 वनडे इंटरनैशनल और 4 टेस्ट मैचों में जीत हासिल की। बोर्डे ने साफ किया कि यही वजह थी कि जैसे ही फिक्सिंग स्कैंडल में भारतीय खिलाड़ियों पर गाज गिरी वैसे ही सचिन तेंदुलकर ने कप्तानी छोड़ने का फैसला कर लिया।
उन्होंने कहा, 'सचिन ने कहा कि वो अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं और टीम के लिए वैसा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं, जैसा वो खेलना चाहते हैं। अंत में हमने गांगुली को कप्तान चुना।'

मदन लाल ने भी सचिन को कहा था स्वार्थी
गौरतलब है कि पूर्व चयनकर्ता चंदू बोर्डे से पहले 1996-97 में भारतीय क्रिकेट टीम के कोच रह चुके मदनलाल ने भी सचिन तेंदुलकर को स्वार्थी और टीम से ज्यादा खुद के लिये खेलने वाला खिलाड़ी बताया था। उन्होंने कहा था कि सचिन खुद के प्रदर्शन को लेकर ज्यादा सजग थे और इसी वजह से वह सफल कप्तान नहीं बन पाये थे।
मदनलाल ने फेसबुक लाइव के दौरान कहा था, मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि वह अच्छे कप्तान नहीं थे, लेकिन वह अपने प्रदर्शन को लेकर खुद में इतना फोकस थे कि वह टीम का ख्याल नहीं रख पा रहे थे।'


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