
बिशन सिंह बेदी के चलते नहीं मिल सकी टीम में जगह
उल्लेखनीय है कि बायें हाथ के स्पिन गेंदबाज राजिंदर गोयल उस दौर में खेला करते थे जब बिशन सिंह बेदी की फिरकी की तूती बोला करती थी और यही वजह थी वो टीम से बाहर नहीं हुए और राजिंदर गोयल को टीम में कभी जगह नहीं मिल सकी। एक इंटरव्यू के दौरान राजिंदर गोयल ने खुद बताया था कि साल 1974 में विंडीज के खिलाफ उन्हें टीम में खेलने का मौका मिला था, लेकिन अंतिम समय में बिशन सिंह बेदी को एक बार फिर से उनकी जगह शामिल कर लिया गया था और वह अपने करियर में कभी भी भारत के लिये नहीं खेल पाये।

हासिल किया था सीके नायडु पुरस्कार
राजिंदर गोयल भारत के लिये फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं जिन्होंने अपना आखिरी फर्स्ट क्लास मैच 1985 में खेला था। अपने फर्स्ट क्लास करियर में राजिंदर गोयल ने 157 मैच खेले और इस दौरान 750 विकेट चटकाने का कारनामा किया।
राजिंदर गोयल ने 44 साल की उम्र तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेला था। इस दौरान गोयल को सीके नायडु पुरस्कार से बीसीसीआई ने सम्मानित किया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि उन्हें यह अवॉर्ड किसी और ने नहीं बल्कि खुद बिशन सिंह बेदी ने ही दिया था।

सुनील गावस्कर मानते थे अपना आदर्श
सुनील गावस्कर ने अपनी किताब ‘आइडल्स' में जिन खिलाड़ियों को अपना आदर्श बताया है उसमें राजिंदर गोयल का भी नाम है। गौरतलब है कि गोयल का करियर भले ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शुरु भी नहीं हो सका लेकिन घरेलू क्रिकेट में काफी लंबा रहा।
उन्होंने पीएम नेहरू के दौर में खेलना शुरु किया और उनके पोते राजीव गांधी के दौर तक खेले। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 750 विकेट चटकाये जिसमें सुनील गावस्कर का विकेट भी शामिल था। बॉम्बे के पदमाकर शिवालकर की तरह वह भी अनलकी रहे कि उन्होंने अपना अधिकतर क्रिकेट बिशन सिंह बेदी के दौर में खेला।


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