
गौतम गंभीर बनाम तीरंदाज हो गया मामला-
इस मामले में और कोई नहीं बल्कि देश की बेहतरीन तीरंदाज दीपिका कुमारी भी कूद गईं हैं जिन्होंने एक ट्वीट किया जिसमें वह स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में तीरंदाजी के हिस्से को क्रिकेट सुविधाओं में तब्दील करने पर अपना विरोध प्रकट कर रही हैं। दीपिका के हिसाब से यह एक अच्छा मैदान है और यहां पर इंटरनेशनल लेवल की तीरंदाजी प्रतियोगिताएं कराई जा सकती है। दरअसल आर्चरी फेडरेशन से जुड़े सदस्यों का मानना है कि गौतम गंभीर इस कॉन्प्लेक्स को केवल क्रिकेट के नजरिए से ही देख रहे हैं। जबकि गौतम गंभीर का कहना है कि यहां पर जो सुविधाएं विकसित होंगी उसका फायदा आर्चरी को भी मिलेगा।

गंभीर के एक ट्वीट के बाद खत्म हुआ है विवाद-
दीपिका कुमारी ने मैदान को लेकर चिंता प्रकट की और उन्होंने बताया था कि वह 2010 के कॉमनवेल्थ गेम में इसी ग्राउंड में खेलते हुए दीपिका बनी हैं। आपको बता दें दीपिका ने उस समय केवल 16 साल की उम्र में गोल्ड मेडल जीतकर तहलका मचा दिया था। गौतम गंभीर ने भी संवेदनाओं को समझते हुए यह आश्वासन दिया कि वह यमुना स्पोर्ट्स ग्राउंड को क्रिकेट मैदान में तब्दील नहीं कर रहे हैं बल्कि केवल अपग्रेड कर रहे हैं जहां पर आर्चरी और अन्य खेल वैसे ही चालू रहेंगे जैसे पहले रहते थे।
गौतम गंभीर की बात से दीपिका को काफी खुशी हुईं हैं और उन्होंने भावनाओं को समझने के लिए भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज का आभार भी प्रकट किया है।

इस ग्राउंड से तीरंदाजों को है खास लगाव-
क्रिकेट बनाम अन्य खेलों को लेकर भारत में विवाद नहीं बात नहीं है। दीपिका कुमारी इंडियन स्पोर्ट्स में एक बड़ा नाम है और उनसे टोक्यो ओलंपिक 2002 में पदक की उम्मीद की जाती है। इसी मैदान को लेकर तीरंदाजों ने गौतम गंभीर इस साल की शुरुआत में भी निशाना साधा था। दरअसल इस मैदान पर भारतीय आर्चरों का इतिहास बड़ा ही शानदार रहा है। पिछले 10 वर्षों में इस मैदान से निकले तीरंदाजों ने नेशनल व इंटरनेशनल लेवल पर कमाल का प्रदर्शन किया है। ऐसे में जब गंभीर ने मैदान के एक हिस्से का नाम अनिल कुंबले के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया तो भारतीय तीरंदाजी संघ ने आपत्ति जताई। गंभीर ने बाद में प्रस्ताव वापस ले लिया था।
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