किस्मत से अंडर-19 वर्ल्ड कप में पहुंचा जापान, विरोधी टीम पर लगा था चोरी का आरोप
नई दिल्ली। जापान की अंडर-19 क्रिकेट टीम पहली बार आईसीसी विश्व कप खेल रही है। उसके लिए यह टूर्नामेंट तब खास बन गया जब उसका पहला मैच बड़ी टीम भारत के खिलाफ 21 जनवरी को हुआ। हालांकि जापान सिर्फ 41 रनों पर ही ढेर हो गया और भारत ने मैच 10 विकेट से जीत लिया। लेकिन जापान का अंडर-19 विश्व कप खेलना भी बड़ी बात है, वो यहां तक कैसे पहुंचा, यह किस्सा बड़ा मजेदार है। पिछले साल क्वालिफायर मैचों में जब आखिरी मुकाबला उनका होने जा रहा था तो विरोधी टीम पर चोरी का आरोप लग गया। इससे जापान की किस्मत खुल गई और वो बिना मैच खेले क्वालिफाई कर गई।

11 खिलाड़ी हुए थे सस्पेंड
दरअसल, पिछले साल जून में पापुआ न्यू गिनी और जापान की टीम को रीजनल क्वालीफायर का फाइनल मुकाबला खेलना था लेकिन मैच से पहले पापुआ गिनी के खिलाड़ियों पर चोरी का आरोप लग गया। टीम के 11 खिलाड़ियों पर टोक्यो के उत्तरी क्षेत्र सानो में दुकान से चोरी करने का आरोप लगा जिसके बाद 11 खिलाड़ियों को सस्पेंड किया गया। इससे अब उनके पास कुल 4 खिलाड़ी बचे थे जिसके कारण वह जापान के साथ मैच नहीं खेल सके।

लाैटाना पड़ा चोरी का सामान
इस चोरी से जापान को फायदा मिल गया। पापुआ न्यू गिनी की टीम की एक गलती ने ना सिर्फ उनको वर्ल्ड कप में नौंवीं बार भाग लेने से रोक दिया बल्कि जापान को पहली बार खेलने का मौका भी दे दिया। साथ ही चोरी किया गया सामान खिलाड़ियों को वापस दुकान में रखना पड़ा। बता दें कि जापान 1996 से ही आईसीसी का एसोसिएट सदस्य है। ये पहली बार है जब जापान की टीम को आईसीसी के किसी बड़े टूर्नामेंट में खेलने का मौका मिला है।

पहला मैच हारा जापान
हालांकि अपने पहले मैच में ही जापान खराब रिकाॅर्ड अपने नाम करवा बैठे। उसने टूर्नामेंट के इतिहास का दूसरा सबसे कम 41 रन का स्कोर बनाया। भारत ने इसमें 19 रन एक्स्ट्रा दे दिए नहीं तो इनका हाल और भी बुरा होता। जापान के 5 बल्लेबाज बिना खाता खोले आउट हो गए जबकि कोई भी बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाया।
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