'तेंदुलकर ने झूठी गवाही दी'
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई उपकप्तान गिलक्रिस्ट ने सचिन की खेल भावना पर सवाल उठाते हुए उन पर भज्जी-साइमंड्स विवाद में झूठी गवाही देने का आरोप लगाया है.
एडम गिलक्रिस्ट ने अपनी आत्मकथा में सचिन तेंदुलकर पर इस तरह के आरोप लगाए हैं. उनकी किताब अगले हफ़्ते विमोचन होना है लेकिन इसके कुछ अंश स्थानीय प्रेस को प्रकाशित करने के लिए दिए गए हैं.
गिलक्रिस्ट का कहना है कि एंड्र्यू साइमंड्स और हरभजन सिंह के बीच हुए झगड़े में भज्जी दोषी थे और इस मामले की सुनवाई के दौरान सचिन ने झूठी गवाही दी थी.
उन्होंने लिखा है कि सचिन पहले सच बोल रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपना बयान बदल दिया.
यही नहीं गिलक्रिस्ट ने सचिन पर की खेल भावना पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि सचिन हारने के बाद विरोधी टीम के खिलाड़ियों से हाथ तक नहीं मिलाते हैं.
'खेल भावना का अभाव'
वो लिखते हैं, "हम मैंदान पर कड़ी टक्कर देते हैं और अंत में हाथ मिलाकर सब कुछ मैदान पर ही छोड़ देते हैं."
वो आगे कहते हैं, "हमारे कुछ प्रतिद्वंद्वी ऐसा नहीं करते. जैसे सचिन तेंदुलकर को लीजिए. भारत को हराने के बाद ड्रेसिंग रुम में हाथ मिलाने के लिए आपको सचिन नहीं मिलेंगे. हरभजन से मिलना मुश्किल हो सकता है."
विवादास्पद सिडनी टेस्ट का ज़िक्र करते हुए गिलक्रिस्ट लिखते हैं, "मैच के बाद हम भारतीय ड्रेसिंग रुम में गए और हाथ मिलाया. हालाँकि वहाँ सभी खिलाड़ी मौजूद नहीं थे, ये सांस्कृतिक विभिन्नता का संकेत देता है."
ग़ौरतलब है कि इसी टेस्ट में हारने के बाद जब आख़िरी बल्लेबाज़ी जोड़ी के रुप में ईशांत शर्मा और कप्तान अनिल कुंबले पैवेलियन लौट रहे थे तो किसी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने उनसे हाथ नहीं मिलाया था और मेज़बान टीम की काफी आलोचना हुई थी.
लेकिन गिली का कहना है कि इस तरह के आरोप ठीक नहीं है और ये इसलिए लगाए गए क्योंकि उस समय हम जो भी कर रहे थे उसकी आलोचना हो रही थी.
'सचिन ने झूठ कहा'
ऑस्ट्रेलिया के इस पूर्व विस्फोटक सलामी बलेल्बाज़ ने भज्जी-साइमंड्स विवाद में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की भूमिका की भी आलोचना की.
सिडनी टेस्ट के दौरान साइमंड्स ने दावा किया था कि हरभजन ने उन्हें 'मंकी' कहा था. ये विवाद उस समय शुरु हुआ जब हरभजन ने ब्रेट ली की पीठ थपथपाई थी.
साइमंड्स अनुशासनहीनता के आरोप में टीम से बाहर हैं.
उन्होंने बीसीसीआई पर 'राजनीति' करने का आरोप लगाया. गिलक्रिस्ट ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी पर बीसीसीआई के दबाव में झुकने का भी आरोप लगाया है.
उन्होंने दावा किया है कि आईसीसी की अपीलीय समिति के सामने विवाद की सुनवाई के दौरान सचिन ने झूठी गवाही दी.
गिली का कहना है, "तेंदुलकर ने पहली सुनवाई के दौरान कहा था कि हरभजन ने क्या कहा, ये वो सुन नहीं सके थे और वो दोनों से काफी दूरी पर थे जिसे मैं भी मानता हूँ. लेकिन बाद में वो पलट गए और कहा कि भज्जी ने हिंदी में कुछ कहा था जो ऑस्ट्रेलियाइयों को मंकी जैसा लगा."
ऐसा माना जा रहा है कि गिलक्रिस्ट के इस किताब से नया विवाद खड़ा हो सकता है क्योंकि अभी भारत में दोनों देश टेस्ट सिरीज़ खेल रहे हैं.
सचिन की तरफ़ से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन ख़ुद हरभजन के साथ कई बार मैदान पर बहस कर चुके ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ मैथ्यू हेडन ने कहा है कि दोनों ही टीमें सिडनी से काफी आगे निकल चुकी हैं.
बल्कि उन्होंने भज्जी की तारीफ़ करते हुए कहा, "इस सिरीज़ में वो काफी बदले हुए हैं और मैदान पर उनकी खेल भावना देखते ही बनती है."
एडम गिलक्रिस्ट ने अपनी आत्मकथा में सचिन तेंदुलकर पर इस तरह के आरोप लगाए हैं. उनकी किताब अगले हफ़्ते विमोचन होना है लेकिन इसके कुछ अंश स्थानीय प्रेस को प्रकाशित करने के लिए दिए गए हैं.
गिलक्रिस्ट का कहना है कि एंड्र्यू साइमंड्स और हरभजन सिंह के बीच हुए झगड़े में भज्जी दोषी थे और इस मामले की सुनवाई के दौरान सचिन ने झूठी गवाही दी थी.
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यही नहीं गिलक्रिस्ट ने सचिन पर की खेल भावना पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि सचिन हारने के बाद विरोधी टीम के खिलाड़ियों से हाथ तक नहीं मिलाते हैं.
'खेल भावना का अभाव'
वो लिखते हैं, "हम मैंदान पर कड़ी टक्कर देते हैं और अंत में हाथ मिलाकर सब कुछ मैदान पर ही छोड़ देते हैं."
वो आगे कहते हैं, "हमारे कुछ प्रतिद्वंद्वी ऐसा नहीं करते. जैसे सचिन तेंदुलकर को लीजिए. भारत को हराने के बाद ड्रेसिंग रुम में हाथ मिलाने के लिए आपको सचिन नहीं मिलेंगे. हरभजन से मिलना मुश्किल हो सकता है."
विवादास्पद सिडनी टेस्ट का ज़िक्र करते हुए गिलक्रिस्ट लिखते हैं, "मैच के बाद हम भारतीय ड्रेसिंग रुम में गए और हाथ मिलाया. हालाँकि वहाँ सभी खिलाड़ी मौजूद नहीं थे, ये सांस्कृतिक विभिन्नता का संकेत देता है."
ग़ौरतलब है कि इसी टेस्ट में हारने के बाद जब आख़िरी बल्लेबाज़ी जोड़ी के रुप में ईशांत शर्मा और कप्तान अनिल कुंबले पैवेलियन लौट रहे थे तो किसी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने उनसे हाथ नहीं मिलाया था और मेज़बान टीम की काफी आलोचना हुई थी.
लेकिन गिली का कहना है कि इस तरह के आरोप ठीक नहीं है और ये इसलिए लगाए गए क्योंकि उस समय हम जो भी कर रहे थे उसकी आलोचना हो रही थी.
'सचिन ने झूठ कहा'
ऑस्ट्रेलिया के इस पूर्व विस्फोटक सलामी बलेल्बाज़ ने भज्जी-साइमंड्स विवाद में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की भूमिका की भी आलोचना की.
सिडनी टेस्ट के दौरान साइमंड्स ने दावा किया था कि हरभजन ने उन्हें 'मंकी' कहा था. ये विवाद उस समय शुरु हुआ जब हरभजन ने ब्रेट ली की पीठ थपथपाई थी.
साइमंड्स अनुशासनहीनता के आरोप में टीम से बाहर हैं.
उन्होंने बीसीसीआई पर 'राजनीति' करने का आरोप लगाया. गिलक्रिस्ट ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी पर बीसीसीआई के दबाव में झुकने का भी आरोप लगाया है.
उन्होंने दावा किया है कि आईसीसी की अपीलीय समिति के सामने विवाद की सुनवाई के दौरान सचिन ने झूठी गवाही दी.
गिली का कहना है, "तेंदुलकर ने पहली सुनवाई के दौरान कहा था कि हरभजन ने क्या कहा, ये वो सुन नहीं सके थे और वो दोनों से काफी दूरी पर थे जिसे मैं भी मानता हूँ. लेकिन बाद में वो पलट गए और कहा कि भज्जी ने हिंदी में कुछ कहा था जो ऑस्ट्रेलियाइयों को मंकी जैसा लगा."
ऐसा माना जा रहा है कि गिलक्रिस्ट के इस किताब से नया विवाद खड़ा हो सकता है क्योंकि अभी भारत में दोनों देश टेस्ट सिरीज़ खेल रहे हैं.
सचिन की तरफ़ से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन ख़ुद हरभजन के साथ कई बार मैदान पर बहस कर चुके ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ मैथ्यू हेडन ने कहा है कि दोनों ही टीमें सिडनी से काफी आगे निकल चुकी हैं.
बल्कि उन्होंने भज्जी की तारीफ़ करते हुए कहा, "इस सिरीज़ में वो काफी बदले हुए हैं और मैदान पर उनकी खेल भावना देखते ही बनती है."
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:19 [IST]
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