ऑटो-रिक्शा चालक पिता ने दी हौसलों को उड़ान तो बेटी जीत लाई बॉक्सिंग में गोल्ड
नई दिल्ली। मेहनतकश लोगों के लिए रुकावट और दिक्कतें महज एक पड़ाव होता है जिसे वो हंसते खेलते पार कर जाते हैं। हुनर और मेहनत से वो हर कठिनाई का सीना चीरकर एक नई इबारत लिखते हैं। संदीप कौर की भी कहानी ऐसी ही है। पोलैंड में आयोजित हुई 13वीं इंटरनैशनल सिलेसियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में संदीप कौर ने गोल्ड मेडल जीता है।

पिता ने दिया साथ:
संदीप कौर के पिता सरदार जसवीर सिंह एक ऑटो-रिक्शा चालक हैं। संदीप की बाॉक्सिंग के लिए पिता जसवीर ने हमेशा साथ दिया। पिता ऑटो-रिक्शा चलाकर इतना ही कमा पाते थे जिससे परिवार वालों का पेट भर सके। आर्थिक तंगी से गुजरते हुए भी उन्होंने हमेशा बॉक्सिंग के लिए अपनी बेटी का साथ दिया।

8 साल की उम्र से बॉक्सिंग:
संदीप ने बताया, 'जब उन्होंने पहली बार बॉक्सिंग ग्लव्स उठाकर ट्रेनिंग शुरू की, तब वह 8 साल की थी।' उन्हें कोच सुनील कुमार ने ट्रेनिंग दी। संदीप के गांव के कई लोग उनके इस खेल से जुड़ने को सही नहीं मानते थे लेकिन संदीप के परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया।
संदीप ने इस बार की इंटरनेशनल सिलेसियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में (52 किग्रा भारवर्ग में) पोलैंड की केरोलिना एम्पुलस्का को 5-0 से हराकर गोल्ड मेडल जीता।

गांव वालों ने दी थी बॉक्सिंग छोड़ने की सलाह:
पटियाला के हसनपुर गांव से ताल्लुक रखने वाली कौर के पिता सरदार जसवीर सिंह एक ऑटो-रिक्शा चालक हैं। संदीप के गांव वालों ने कई बार उनके माता-पिता से कहा कि वह संदीप का खेलना बंद करवाएं, मगर संदीप के माता-पिता ने उनका साथ नहीं छोड़ा।
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