नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) देर से ही सही, आईपीएल का असली खेल सामने आ ही गया। नतीजन चेन्नई और राजस्थान की टीमें दो साल के लिये बाहर कर दी गयी। इनके मालिकान फिक्सिंग और सट्टेबाजी के गंदे खेल में संलिप्त पाये गये।
दोनों ही टीमें आईपीएल का खिताब जीत चुकी हैं। चेन्नई तो कई बार की चैंपियन है। वरिष्ठ लेखक ओमकार चौधरी कहते हैं कि मुझे लगता है कि टीमों को बाहर कर दिये जाने मात्र से काम नहीं चलने वाला।
बहुत कड़े संदेश दिये जाने की जरूरत है। इस गंदगी को जड़मूल से उखाड़ फैंकने का वक्त आ गया है। दरअसल कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि आईपीएल का खेल ही बंद होना चाहिए भारत में।
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संस्कृति से मजाक
समय और पैसा दोनों का दुरूपयोग है इसमें। ऊपर से वे अधनंगी नाचने वालियां भारतीय संस्कृति का दिवालिया निकाल के रख दिया। बहरहाल, अब कहा जा रहा है कि चैन्नै और राजस्थान रायल्स टीमों को बोर्ड चलाएगा।
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जो होगा, उसका पता चला जाएगा। पर क्रिकेट खेल के साथ तो भरपूर खिलवाड़ हो ही रही है। अब वक्त की मांग है कि सरकार क्रिकेट बोर्ड के कामकाज को देखें। यहां पर होने वाले गोरखधंधों पर नजर रखे।