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जीएसटी दर: अगले साल महंगे आईपीएल के लिए तैयार रहें

जीएसटी काउंसिल ने हेल्थ केयर, गैर-एसी यात्रा और शिक्षा को अपने दायरे से छूट दी है जिसका मतलब है कि यह प्रस्तावित अप्रत्यक्ष कर शासन के तहत जारी रहेगा। समझिए आईपीएल के महंगे होने का गणित।

जीएसटी परिषद ने शुक्रवार को नई टैक्स व्यवस्था को लागू करने की ओर कदम बढ़ा दिया है। नए ढांचे के तहत सेवाओं को चार टैक्स स्लैब में विभाजित किया गया है। जिसके तहत 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत के चार स्लैब हैं। संभवत: 1 जुलाई से लागू किए जाने वाले जीएसटी को लेकर फिलहाल 1,211 आइटम्स की दरें तय कर ली हैं। इनमें से ज्यादातर आइटम्स को 18 पर्सेंट स्लैब के दायरे में रखा गया है। हालांकि अधिकांश सेवाओं को बड़े पैमाने पर छूट दी गई है तो कुछ सेवाओं पर कम प्रभाव पड़ेगा। लेकिन इससे आईपीएल देखना भी महंगा होगा।

जी हां आईपीएल टिकट खरीदने या उन रेस क्लबों में शांमिल होने से पहले दो बार सोचों। क्योंकि आईपीएल के टिकटों को 28 प्रतिशत टैक्स स्लैब में रखा गया है। इस हिसाब से आईपीएल के टिकट महंगे होना तया है। वहीं इसके अलावा रेस क्लबों में सट्टेबाजी के लिए अब आप पर 28 फीसदी का टैक्स लगाया जाएगा। दूरसंचार सेवाएं भी थोड़ी महंगी हो सकती हैं लेकिन सरकार का मानना है कि टैक्स की दर 18 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद 'इनपुट' टैक्स क्रेडिट कीमतों को समान रख सकता है। यही नियम वित्तीय सेवाओं के लिए भी लागू रहेगा।

Story first published: Monday, November 13, 2017, 11:17 [IST]
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