दिल्ली। भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली के आतिशी खेल से तो सब वाकिफ हैं लेकिन दिल्ली के इस छोरे के लिए क्रिकेट कितना मायने रखता है इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि साल 2008 में रणजी ट्रॉफी मैच में दिल्ली की ओर से कर्नाटक के लिए वो उस दिन खेल रहे थे जिस दिन उनके पिता प्रेमजी कोहली ने दुनिया को अलविदा कह दिया था।
पेश से वकील उनके पिता प्रेम जी काफी समय से बीमार थे, जिस समय उन्होंने दुनिया छोड़ी उस समय कोहली घर पर नहीं बल्कि मैदान पर थे। मैच के बाद उन्हें इस बात की जानकरी दी गई। आप इस बात अंदाजा लगा सकते हैं कि कोहली के लिए उनका खेल कितना महत्वपूर्ण है जिसकी वजह से उनके घरवालों ने इतनी बड़ी बात भी उन्हें मैच के दौरान नहीं बतायी।
कहा जाता है कि कोहली जब तीन साल के थे उन्होंने प्लास्टिक का बैट उठाकर अपने पापा से कहा था कि वो बॉलिंग करें, तब ही उनके मां-बाप को अंदाजा हो गया था कि हो सकता है कि आगे चलकर यह क्रिकेट की दुनिया में ही नाम कमाये।