विश्व कप में नहीं चला फिरकी का जादू, 'कुलचा' समेत सभी स्पिनर्स ने बनाए ये प्लॉप रिकॉर्ड
नई दिल्ली: विश्व कप के 12वें संस्करण में नाखुन चबाने वाले फाइनल मुकाबले के बाद इंग्लैंड ने पहली बार क्रिकेट की सबसे बड़ी ट्रॉफी उठने का सौभाग्य प्राप्त किया। उधर, न्यूजीलैंड लगातार दूसरे विश्व कप फाइनल में पहुंचकर भी एक बार फिर से मायूस घर लौटा। कुल मिलाकर आईसीसी ने एक यादगार टूर्नामेंट के संचालन को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके लिए वह बधाई की पात्र है। अनेकों घटनाक्रमों के साथ इस विश्व कप में कुछ हैरानी भरी चीजें भी देखने को मिली। इसमे एक ऐसी ही चीज है- स्पिनरों की विफलता। ये क्रिकेट का एक वैश्विक मंच था जहां पर दुनिया के सभी बेजोड़ स्पिनर अपनी कला का नमूना दिखाने के लिए तैयार थे लेकिन एक भी स्पिनर इस प्रतियोगिता में अपना सिक्का नहीं चला सका। भारत को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा क्योंकि कुलदीप-चहल की मारक जोड़ी भी विश्व कप में टीम इंडिया का ट्रंप कार्ड नहीं साबित हो सकी।

12 विकेट लेने वाले चहल रहे सबसे सफल स्पिनर-
स्पिनर किस कदर विफल रहे इसको इसी उदाहरण से समझा जा सकता है कि आईसीसी ने विश्व कप की टीम ऑफ द टूर्नामेंट में किसी भी विशेषज्ञ स्पिनर को जगह नहीं दी। केवल शाकिब-अल-हसन इस टीम में जगह बना पाए लेकिन वह भी इसलिए क्योंकि उन्होंने गेंद से नहीं बल्कि बल्ले से कहीं अधिक चमकदार प्रदर्शन किया था। जबकि इस बार यह माना जा रहा था कि लेग स्पिनरों को काफी सफलता मिलने वाली है। 40 साल के ताहिर से लेकर 20 साल के राशिद खान तक इस लिस्ट में शामिल थे। लेकिन कोई भी अपने नाम के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सका। अगर आप भारत के युजवेंद्र चहल को देखेंगे तो इस स्पिनर को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में शुरुआत तो अच्छी मिली थी। उन्होंने चार विकेट लिए थे लेकिन बाद में मैचों में वह कुछ खास नहीं कर सके और 8 मैचों में 12 ही विकेट झटक पाए। इस दौरान उनका इकॉनमी रेट भी लगभग 6 का रहा। इसके बावजूद भी इस विश्व कप में चहल सबसे सफल स्पिनर रहे।
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राशिद खान और इमरान ताहिर-
तेज गेंदबाजों ने जहां कुल 492 विकेट इस प्रतियोगिता में अपने नाम किए तो वहीं स्पिनर्स केवल 136 ही विकेट ले पाए। इसी बात से स्पिनर्स की दुर्गति का पता लग जाता है। अफगानिस्तान की टीम अगर एक भी मैच नहीं जीत पाई तो इसका काफी हद तक श्रेय राशिद खान के प्रदर्शन को भी जाता है। उन्होंने काफी घटिया प्रदर्शन करते हुए 7 मैचों में केवल 9 विकेट लिए और 416 रन खर्च कर दिए। खासकर इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 9 ओवरों में जो 110 रन पिटवाए थे उसको भूलना आसान नहीं है। राशिद से ठीक दोगुने उम्र के ताहिर का रिकॉर्ड अपेक्षाकृत बेहतर रहा और उन्होंने 9 मैचों में 11 विकेट लिए और उनका रन रेट भी 5 से कुछ नीचे रहा। ये ताहिर का अंतिम विश्व कप का था और उनको अपनी टीम के साथी गेंदबाजों से वैसी सपोर्ट नहीं मिल सकी जैसी की उनको चाहिए थी। क्रिस मॉरिस 13 विकेटों के बाद ताहिर प्रोटियाज की ओर से सबसे सफल गेंदबाज रहे।

एडम जांपा, नाथन लियोन और कुलदीप यादव
एडम जांपा ऑस्ट्रेलिया के युवा स्पिनर हैं उन्होंने इस विश्व कप के दौरान केवल 4 मैच खेले और उसमे 5 ही विकेट वे झटक पाए। जांपा को आगे इसलिए भी मौका नहीं दिया गया क्योंकि कंगारू टीम अपने पेस अटैक पर ही ज्यादा निर्भर थी। ऑस्ट्रेलिया के दूसरे स्पिनर नाथन लियोन के आंकड़े तो इससे भी खराब हैं। उन्होंने भी चार मैच खेले और केवल 3 विकेट लिए। वहीं अगर भारत के कुलदीप यादव की बात करें तो यह गेंदबाज बहुत ही खराब फार्म के साथ विश्व कप खेलने आया था और यहां भी उन्होंने अपना निराशाजनक प्रदर्शन जारी रखा। इस चाइनामैन गेंदबाज को 7 मैचों में केवल 6 ही विकेट मिले और उनका औसत 56 से भी ऊपर रहा। केवल पाकिस्तान के खिलाफ मैच में बाबर आजम को एक खूबसूरत गेंद पर आउट करना कुलदीप की एकमात्र उपलब्धि रही।
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