2nd Test, IND vs BAN: आखिर लाल के बदले पिंक बॉल से क्यों खेला जाता है डे-नाइट टेस्ट?
नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक टेस्ट मैच कोलकाता के ईडन गार्डन्स पर खेला जाने वाला है। टेस्ट मैचों का आधुनिक रूप डे-नाइट भारत-बांग्लादेश के लिये ऐतिहासिक शुरुआत होने जा रहा है। आज भी फैन्स और क्रिकेट एक्सपर्टस का मानना है कि क्रिकेट का असली प्रारूप टेस्ट मैच ही है। यह एलीट होता है, इसमें पारंपरिक,ओल्ड फैशनड, खिलाड़ियों की सफ़ेद ड्रेस, लाल रंग की बॉल और पांच दिन चलने वाला गेम जिसमें बल्लेबाजों और गेंदबाजों के टैलेंट का असल परीक्षण होता है। हालांकि क्रिकेट का असली प्रारूप मानने के बावजूद टेस्ट क्रिकेट के सामने वनडे और टी20 क्रिकेट मैचों की बढ़ती लोकप्रियता एक बड़ी चुनौती है।
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्तर पर 1970 में पहली बार खेला गया वनडे मैच पहले ही काफी लोकप्रिय था लेकिन साल 2000 के बाद टी-20 मैच, टी10 और 100 बॉल क्रिकेट के आने से टेस्ट मैच के सामने और चुनौती खड़ी हो गई। टेस्ट को सबसे ज्यादा पसंद करने वाले देशों में शुमार भारत में भी क्रिकेट फैन्स कम होने लगे और दर्शकों की संख्या कम होने लगी।
तेजी से बदलती क्रिकेट को देखते हुए टेस्ट क्रिकेट में बदलाव की जरूरत महसूस हुई जिसके चलते साल 2015 में एडिलेड के ओवल में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की टीम ने पहला डे-नाइट टेस्ट मैच खेला जिसमे कीवी टीम ने तीन विकेट से जीत हासिल की थी।
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तब से लेकर अब तक कुल 11 डे-नाइट मैच खेले जा चुके हैं और कोलकाता के ईडन गार्डन्स में भारत का पहला लेकिन दुनियां का 12वां टेस्ट मैच खेला जा रहा है।

लाल की जगह पिंक बॉल से मैच क्यों
इन मैचों में सिर्फ खेल का वक्त ही नहीं बदला गया बल्कि गेंद का रंग भी बदल दिया गया। डे-नाइट मैचों में लाल की जगह पिंक बॉल का इस्तेमाल होता है। ऐसा करने के पीछे मुख्य कारण है सूरज की रोशनी का न होना। जी हां आम टेस्ट मैचों मे खिलाड़ी सूरज की रोशनी में खेलते हैं जबकि डे-नाइट के दौरान उसे स्टेडियम लाइट में खेलना पड़ता है। फ़्लडलाइट में बैट्समैन के लिए रेड बॉल को देखना मुश्किल होता है जबकि पिंक बॉल आसानी से देखी जाती है तो इसलिये लाल की जगह पिंक बॉल का प्रयोग किया जाता है।

क्या पिंक बॉल और डे-नाइट मैच ज़्यादा दर्शकों को आकर्षित करेगा?
बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली का मानना है कि टेस्ट मैच में इन बदलावों के बाद दर्शक जुटाने में काफी मदद मिलेगी। वहीं इसके उलट हरभजन सिंह का मानना है कि सिर्फ पिंक बॉल और डे-नाइट कर देने से कुछ नहीं बदलने वाला, इसके लिये आपको छोटे शहरों में ज्यादा मैच कराने होंगे। वहीं राहुल द्रविड़ का मानना है कि बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना होगा और फेस्टिव सीजन पर क्रिकेट फेस्ट का आयोजन कराना होगा।
खैर क्रिकेट का कोई भी बदलाव फैन्स को आकर्षित कर सकता है लेकिन अगर दर्शकों को स्टेडियम बुलाना है तो बाकी चीजों पर भी ध्यान देना होगा। हालांकि ये ज़रूर हो सकता है कि इन सबसे टीवी पर मैच देखने वालों की संख्या में इजाफ़ा हो जाए।

'ब्लैक सीम से गेंद देखने में बल्लेबाजों को होगी मुश्किल
बांग्लादेश के खिलाफ इस सीरीज में भारतीय टीम हावी नजर आई है जिसके चलते कोलकाता में होने वाले मैच में भी वह दबदबा बरकरार रख सकती है। इस दौरान बल्लेबाजों को एक और चीज है जिससे मुश्किल का सामना करना पड़ेगा और वो है पिंक बॉल की 'ब्लैक सीम', जिसे बल्लेबाजों के लिये देख पाना मुश्किल होता है।
भारत के पूर्व तेज गेंदबाज मदन लाल का मानना है कि सीरीज में अच्छी लय में नजर आ रही भारतीय टीम की तेज गेंदबाजी तिकड़ी पिंक बॉल से बांग्लादेश के लिये मुश्किलें खड़ी कर सकती है। पिंक बॉल की काली सीम को देख पाना बांग्लादेशी क्रिकेटरों के लिए मुश्किल होगा। इसके अलावा पिंक बॉल में मूवमेंट काफी देखने को मिलती है तो ओस की वजह से स्पिनर्स को परेशानी हो सकती है।

इन बदलावों के चलते क्या बदल जाएगा टेस्ट क्रिकेट?
क्रिकेट विशेषज्ञ इस मुद्दे पर 2 पक्ष मे बंटे हुए हैं। लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि मैच के आखिर में फैन्स किस तरह से टेस्ट क्रिकेट के इन बदलावों का स्वागत करते हैं। लोगों ने कई वर्षों तक टेस्ट क्रिकेट का जमकर लुत्फ़ उठाया है लेकिन जैसे बाकी चीज़ें बदलती हैं, वैसे ही क्रिकेट भी बदला है।
वहीं टेस्ट क्रिकेट में नए बदलावों पर बात करते हुए मदन लाल ने कहा कि इसे डे क्रिकेट की जगह लेने में काफी समय लगेगा। यह आसान नहीं होगा कि हम डे क्रिकेट बंद कर सिर्फ डे-नाइट टेस्ट मैच खेलें।
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