नागपुर। स्पिन गेंदबाजी की बदौलत जो टीम इंडिया भारतीय पिच पर टी-20 विश्वकप जीतने का सपना देख रही थी, वह विश्वकप के पहले ही मैच में भारतीय टीम के लिए भारी साबित हुआ है। जिस तरह से नागपुर पिच को स्पिन के लिए मददगार बनाने की कोशिश हुई और उसकी जाल में भारत की टीम को इस कदर जूझना पड़ेगा उसका किसी को भी अंदाजा नहीं था।
जानिए न्यूजीलैंड के आगे क्यों पस्त हो गये भारतीय शेर?
घेरलू पिच का फायदा उठाना बेहतर होता है, लेकिन जिस तरह से नागपुर की पिच इतनी जबरदस्त तरीके से टर्न ले रही थी उसका किसी ने भी अंदाजा नहीं लगाया था। नागपुर की इसी पिच पर आखिरी बार जब भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्ट मैच खेला गया था तो वह मैच सिर्फ तीन दिन में खत्म हो गया था। जिसके बाद इस पिच को मैच रेफरी ने खराब रेटिंग दी थी।
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नागपुर की पिच पर जब न्यूजीलैंड पहले बल्लेबाजी करने उतरी थी तो इस बात का अंदाजा तो सभी को था कि पिच टर्न लेगी, न्यूजीलैंड के कप्तान ने पिच को बखूबी समझा और टीम ने बहुत ही सधी हुई बल्लेबाजी की। न्यूजीलैंड के बल्लेबाज छोटी-छोटी पार्टनरशिप के जरिये स्कोर को आगे बढ़ाते रहे लेकिन उससे इतर भारतीय टीम 15 से 20 रन की भी पार्टनरशिप करने में सफल नहीं हुई।
पिच जिस तरह से दूसरी पारी में टर्न ले रही थी उसे देखकर धोनी को खुद भी अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा था कि वह किसी स्कूल की पिच में खेल रहे हैं या अंतर्राष्ट्रीय पिच पर। हालांकि शुरुआती भारतीय बल्लेबाजों ने अपनी गलती के चलते विकेट गंवया। रोहित शर्मा, युवराज सिंह, सुरेश रैना ने बहुत ही आसानी से अपना विकेट गंवा दिया। टीम के खिलाड़ी खुद को पिच के हिसाब से ढालने में विफल रहे।
इस हार के बाद देखने वाली बात यह होगी की टीम के डॉयरेक्टर रवि शास्त्री पिच क्यूरेटर पर किस तरह से अपना गुस्सा निकालते हैं। हालांकि मैच के बाद धोनी ने इस बात को स्वीकार किया कि उनके बल्लेबाज पिच के हिसाब से खुद ढालने में पूरी तरह से विफल रहे।