बेंगलुरू। विश्वकप में जिस तरह से भारत की टीम सेमीफाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया से हारकर बाहर हुई उससे करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों को काफी निराशा हुई। इस मैच में जिस तरह से धोनी ने बिना ठीक तरीके से जज किये रन लिाया और आउट हुए वह निराशाजनक था। धोनी को विश्वकप के सेमीफाइनल मैच में सर्वाधिक रन बनाने के बाद आउट कैसे हो सकते थे।
वहीं इस मैच के दौरान मैच देख रहे एक युवक का महज 2 साल का बच्चा मैदान पर किसी भी भारतीय बल्लेबाज के बल्लेबाजी करने पर सिर्फ धोनी-धोनी चिल्लाता है। उनका कहना है कि मुझे यह देखकर गुस्सा आता है जब मेरा बच्चा सिर्फ धोनी-धोनी चिल्लाता है। मैच के बाद जिस तरह से धोनी मुस्कुराते हुए माइकल क्लार्क से हाथ मिला रहे थे वह काफी निराशाजनक था। मतलब ऐसा कैसे हो सकता है कि हार की कगार पर खड़ा आप गुस्सा नहीं दिखायें गालियां नहीं दे।
धोनी खुद की सोच को और खिलाड़ियों के अंदर कुछ इस तरह से भरते हैं कि वह खिलाड़ी उनके जैसा ही सोचने लगता है जोकि खतरनाक है। मैं नहीं चाहता कि धोनी को मेरा बच्चा अपना हीरो मानते हुए बड़ा हो। या वह हमेशा यह सोचे कि धोनी कैप्टन कूल हैं। क्या कभी स्वाभिमानी भारतीय तनाव में शांत रह सकता है। भारतीय का रहन-सहन और सोच अलग है। भारतीय अपनी सीमायें तोड़कर अपना गुस्सा दिखाते हैं, धोनी में भारतीयता की कमी लगती है।
मेरा मानना है कि धोनी टीम के कप्तान हैं वो तकरीबन 8 साल से और सिर्फ बेकार की वजहों से सुर्खियां बनाते हैं। हमेशा से धोनी के बारे में यही चर्चा हुई की उनकी कप्तानी में भारत कैसे जीता। यह सब सुनकर बोरियत होती है। मतलब मनोरंजन कहां है, आजकल तो खिलाड़ी हर बात को लेकर चर्चा में रहते हैं कभी, गर्लफ्रैंड को लेकर तो कभी टैटू को लेकर। कैसा क्रिकेट का कैरियर रहा है धोनी का कभी भी अच्छी वजहों से सुर्खियों में रहे ही नहीं।
मतलब धोनी ने क्या किया अपने जीवन में ना कभी उनका किसी से अफेयर के चर्चे आये उनके बारे में ना स्विस बैंक में अकाउंट के। ये तो हद हो ही हो गयी आपकी बेटी पैदा हुई और आफ क्रिकेट खेल रहे हैं। भारतीय संस्कार कभी भी ऐसा नहीं सिखाते है। धोनी भारतीय मर्यादाओं को तोड़ते हैं और शांत होकर हर चीज को शालीनता से लेकर मुस्कुराते हुए चले जाते हैं। ये सारे लक्षण भारतीय युवा के नहीं हो सकते हैं। मेरा मानना है कि धोनी एक ही और इसके जैसा कोई दूसरा नहीं हो सकता है।