श्रीलंका के डबल 'M' फैक्टर से हार गया इंग्लैंड, 23 साल बाद बना यह अनोखा रिकॉर्ड

नई दिल्ली : क्रिकेट के शब्दकोष में क्रिकेट पंडितों और कमेंट्री करने वालों के लिए भले ही कमजोर टीम, मिनोज़, अपसेट और लॉ रैंक टीम जैसी शब्दावली उनकी कमेंट्री की शोभा बढ़ाते हैं लेकिन किसी भी टीम के लिए मैदान पर जाते ही ये शब्द बिछावन पर पड़ी उस सिलवटों की तरह सिमट जाते हैं जिसका कोई अस्तित्व नहीं रह जाता है। श्रीलंका की टीम ने शुक्रवार को हेडिंग्ले के लीड्स मैदान पर अपनी टीम के लिए इस्तेमाल किए गए इन विशेष्य विशेषणों को मोटिवेशन का हथियार बनाया और टूर्नामेंट जीतने की प्रबल दावेदार कही जाने वाली इंग्लैंड के खिलाफ एक रोमांचक मुकाबले में फतह हासिल की। इस जीत से ऐसा लगता है कि श्रीलंका ने अपने नाम के आगे लगे श्री को सुशोभित कर दिया जिसे भारतीय संस्कृति में सम्मान सूचक शब्द कहा जाता है। श्रीलंका की जीत में डबल 'M' फैक्टर सबसे अधिक हावी रहा और शायद बदतर हालात में पहुंच चुकी श्रीलंका टीम की कायापलट के लिए यह जीत टॉनिक का काम करेगी।

क्या है डबल 'M' फैक्टर

क्या है डबल 'M' फैक्टर

विश्व कप के इतिहास में शायद यह पहला मौका है जब वर्ल्ड कप 2019 को क्रिकेट पंडित नीरस टूर्नामेंट कहने लगे थे। जीतने वाली टीम एकतरफा जीत रही थ और लगभग सभी मैच एकतरफा हो रहे थे। इस विश्व कप में मात्र 2 मुकाबले ऐसे हुए हैं जिन्हें आप विश्व कप की कैटेगरी में स्तरीय मैच कह सकते हैं। पहला दक्षिण अफ्रीका बनाम न्यूजीलैंड के बीच खेला गया मैच और दूसरा इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच शुक्रवार को खेला गया मैच। श्रीलंका के दो सबसे अनुभवी खिलाड़ी ने इस मैच में जान फूंक दी और क्रिकेट पंडितों की भाषा में एक बड़ा अपसेट कर दिया। श्रीलंका की जीत के सबसे बड़े हीरो बने एंजेलो मैथ्यूज और लसिथ मलिंगा। 'M' नाम वाले इन दो खिलाड़ियों ने आखिर कैसे पलट दिया इतिहास।

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मैथ्यूज की मैजिकल पारी

मैथ्यूज की मैजिकल पारी

हाल के दिनों में श्रीलंकाई टीम कप्तानी विवाद और ट्रांसफॉर्मेशन से जूझ रही है। ऐसी स्थिति में पहले बल्लेबाजी करते हुए कमजोर कही जाने वाली इस टीम ने इंग्लैंड के सामने जब 233 रनों का लक्ष्य दिया तो यह आसान टारगेट लग रहा था लेकिन इंग्लैंड की मजबूती ही उनकी कमजोरी बन गई। पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका के विकेट गिरते जा रहे थे लेकिन मैथ्यूज ने नाबाद 85 रनों की पारी खेली। श्रीलंकाई टीम के बल्लेबाज एक तरफ गैर जिम्मेदाराना शॉट खेल कर आउट हो रहे थे वहीं मैथ्यूज ने बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभाई और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।

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विंटेज मलिंगा की शानदार गेंदबाजी

विंटेज मलिंगा की शानदार गेंदबाजी

35 साल के मलिंगा ने 52 दिन के भीतर अपनी दो टीमों को दोहरी खुशी दी, पहले उन्होंने आईपीएल में मुंबई इंडियंस को फाइनल में जीत दिलाई और वर्ल्ड कप में एक बार फिर उनका विंटेज अवतार देखने को मिला और उन्होंने शानदार गेंदबाजी की और 10 ओवर की गेंदबाजी में 1 मेडन देकर इंग्लैंड के चार बड़े खिलाड़ी को पवेलियन का रास्ता दिखाया। उन्होंने अपनी गेंदबाजी में महज 43 रन खर्च किए। उन्होंने महज 26 मैच में 50 वर्ल्ड कप विकेट लिए हैं जो एक विश्व रिकॉर्ड है। यह उपलब्धि हासिल करने में मैक्ग्रा और मुरलीधरन ने 30 मैच खेले जबकि वसीम अकरम को 34 मैच खेलने पड़े थे।

पिछले 4 वर्ल्ड कप में 4 कमाल

पिछले 4 वर्ल्ड कप में 4 कमाल

पिछले चार वर्ल्ड कप में इंग्लैंड ने श्रीलंका के खिलाफ कोई भी वर्ल्ड कप मैच नहीं जीता है। 1975 से लेकर 1992 के बीच हुए वर्ल्ड कप मुकाबले में इंग्लैंड ने सभी 5 वर्ल्ड कप मुकाबले जीते थे वहीं 1996 से 2019 के बीच श्रीलंका ने 5 मुकाबले जीते हैं और इंग्लैंड को महज एक जीत से संतोष करना पड़ा है। 2007 से लेकर 2019 के बीच हुए चार वर्ल्ड कप मुकाबलों में इंग्लैंड को श्रीलंकाई टीम ने चार बार हराया है जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है। पिछले चार सालों में यह पहला मौका था जब बल्लेबाजी में सशक्त कही जाने वाली टीम इंग्लैंड महज 233 का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई।

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Story first published: Saturday, June 22, 2019, 13:32 [IST]
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